*नवम भाव में चंद्र ग्रह या दोष युक्त चंद्र ग्रह
*नैसर्गिक रूप से चंद्रमा एक शुभ ग्रह है।*
*पक्ष बली होने के साथ साथ पक्षों से ही इसकी शुभता व अशुभता का विचार किया जाता है।*
*चंद्रमा मन का कारक है और लग्न का अतिविशिष्ट कारक ,तो नवमस्थ होने के कारण जातक धार्मिक विचारों वाला, धर्म में रूचि रखने वाला हो सकता है होगा या नहीं होगा यह उसकी शुभता /अशुभता पर भी निर्भर करेगा यहां पर अन्य ग्रहों की दृष्टि भी प्रभाव डालेगी फिर भी इतना अवश्य कहा जा सकता है कि जातक के मन में धर्म के प्रति आस्था अवश्य होगी।*
*काल पुरुष कि कुंडली में चतुर्थ भाव का स्वामी और माता का कारक होने के कारण माता भी धर्म परायण होगी लेकिन अपने भाव से षडाष्टक होने के कारण उनके स्वास्थ्य में कुछ कमी हो सकती है अपने स्वास्थ्य और मानसिक परेशानी के कारण अंदर ही अंदर परेशान रहती होगी*
*चतुर्थ भाव से विचारणीय सारे फल जैसे भुमि भवन मकान ,गाड़ी , शान्ति इत्यादि भाग्य से या कम मेहनत से प्राप्त हो सकते हैं लेकिन षडाष्टक होने के कारण जातक के मन में कुछ परेशानी बनी रह सकती है कि यह मेरा कमाया नहीं है। वह उन सब के प्रति उदासीन भी हो सकता है।*
*सप्तम का अति विशिष्ट कारक होने के कारण भाग्योदय विवाहोपरांत हो ऐसी सम्भावना बनती है।*पत्नी धार्मिक विचारों वाली हो सकती है लेकिन अगर चंद्र दृष्टि या किसी अन्य योग युति के कारण अशुभ हो रहा हो तो विवाह के उपरांत बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है*
*चंद्रमा मन का कारक है।*
*और इसे पुनर्जन्म का कारक भी माना जाता है।क्यों कि अंत समय जो इच्छा हमारे अंदर होती है उसके अनुरूप ही हमें अगला जीवन मिलता है।*
*अंत मति सो गति*
*भाग्य में सुख होने के बावजूद उसका अनुभव न कर पाना, यह नवम भावस्थ चंद्रमा दर्शाता है।*
*नवम से दशम छठा भाव आता है।*
*भाग्य का पुर्वाध कर्म भाव।*
*जहां से रोग रिपु ऋण और षड रिपुओं का विचार किया जाता है तो यहां पर सम्भावना यह बन सकती है कि जातक पुर्व जन्म में रोग से घिरा हो अंत समय हरि से यही प्रार्थना मन ही मन करे कि मैं आगे धर्म कार्य अथवा हरि संकीर्तन प्रभु भजन अवश्य करूंगा ऐसा ही ऋण में घिरा व्यक्ति भी कर सकता है और कई तो इन सबमें लिप्त ही अंतिम सांस ले लेते हैं और इस जीवन में सब कुछ सुख समृद्धि सम्पत्ति होने के बावजूद अंत तक संघर्ष करते रहते हैं।*
*छठे भाव से नवम भाव , चतुर्थ यानी सुख भाव, होने के बावजूद उस सुख को अनुभव नहीं कर पाते जिसे वह ताउम्र करना चाहते हैं पढ़ाई के बाद सुख तलाशते हैं तो नौकरी में फंस जाते हैं,नौकरी से शादी में, शादी से बीवी बच्चों में, फिर उनकी पढ़ाई लिखाई,शादी विवाह में यानी ताउम्र एक कोल्हू के बैल की तरह लगे रहते हैं मन ही मन एक सुख की तलाश में ही सारा जीवन व्यतीत होता हुआ दिखाई देता है लेकिन ध्यान से देखें तो उनको यानी उन्हें वह सुख प्राप्त होता है बस वह उसका आपाधापी वाले जीवन में अनुभव ही नहीं कर पाते वो समझ ही नहीं पाते हैं*
*कुछ ऐसा ही नवमस्थ चंद्रमा का प्रभाव मन पर भी देखने को मिलता है।*
*नवम भाव में चन्द्रमा का होना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं पुर्व जन्म में, अंत समय हमारे मन में जरुर कोई धार्मिक कार्य करने की इच्छा, अथवा धर्म स्थलों पर जाने की इच्छा, अथवा धार्मिक आध्यात्मिक पुस्तको को पढ़ने की इच्छा जागृत हुई होगी या फिर किसी कारण वश यह इच्छा बाकी रह गई होगी जिस कारण हमें यह जन्म मिला है।*जिसमें हमने इन इच्छाओं को पुर्ण करना होता है।*
*लेकिन यह चंद्रमा है , हमें सहुलियत से यह सब उपलब्ध भी हो जाए तो भी वहां नहीं जाएंगे और न ही पठन पाठन करेंगे इसे अन्य ग्रहों की दृष्टि और चंद्रमा के बलाबल और शुभता अनुसार विचारा जा सकता है।*
*उदाहरणार्थ कई बार ऐसे जातकों का जन्म तीर्थ स्थलों के नज़दीक पर तो होता है लेकिन वह अपने पास के ही पौराणिक मंदिर अथवा तीर्थ स्थलों पर सालों साल तक नहीं जाते और लोग दूर दूर से आकर माथा टेकते हैं और उनकी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है लेकिन जातक खुद नज़दीक होने पर भी फ़ायदा नहीं उठा पाते है*
*और कई बार तो उन्हें स्वयं ही नहीं ज्ञात होता कि जहां उनका जन्म हुआ है वह स्थान बहुत पवित्र और तीर्थ स्थान है जबकि पुर्व के कर्म अनुसार उन्हें फल मिल चुका होता है इसका उन्हें उसका भान ही नहीं होता और अन्य स्थानों के लोग वहां दर्शन करने के लिए आते जाते रहते है।*
*चतुर्थ भाव से षडाष्टक होने के कारण नवमस्थ चंद्रमा वाले जातकों के संबंध अपनी माता से ज्यादा ठीक नहीं रहते जातक के बड़े भाई हों तो यह कुछ ज्यादा ही हो जाता है माता ध्यान रखती है, और माता का स्नेह भी इन्हें मिलता है, पर फिर भी देखने में आता है कि माता का झुकाव बड़े पुत्र की ओर ही ज्यादा रहता है।*
*महाभारत में भी कुंती का झुकाव अपने अन्य पुत्रों की अपेक्षा युधिष्ठिर की ओर ज्यादा था अब वो अलग बात है कि वह उसे राजधरोहर मानती थी।*
*(2)*
*वृहस्पति जगत जब साथ या साथी*
*समुद्री हवाई बहता हो।*
*छोटी बेड़ी से हरदम अपनी*
*बेड़ा जंगी कर लेता हो।*
*यदि किसी भी प्रकार से नवमस्थ चंद्रमा को गुरु का साथ मिल जाए या युति गत हो, चंद्रमा महान सागर की तरह होगा। अर्थात सब तरफ से खुशहाली होगी। समुद्री और हवाई ताकत में बरकत होगी।*धन दौलत जमीन जायदाद सबकुछ होगा।*
*चाहे जातक का जन्म गरीब परिवार में ही क्यों न हुआ हो, वह छोटी बेड़ी अर्थात, छोटे से काम को भी ऊंचाइयों तक ले जाएगा।एक छोटी सी बेड़ी से बहुत बड़ा बेड़ा खड़ा कर लेगा अपनी जंगी अर्थात मेहनत और भाग्य की बदौलत अपने जीवन में हर तरह के सुख प्राप्त कर लेता है और जीवन में नाम कमा लेते हैं*
*ऐसा जातक अगर समुद्री या वायुसेना में भर्ती हो जाए तो, चंद्र गुरु युति उसे उच्च पदवी पर ले जाएगी। यहां बैठे चंद्रमा की दृष्टि पराक्रम भाव पर होगी, और तृतीय भाव, द्वितीय से द्वितीय अर्थात अगर जातक वाणी से धन कमा रहा होगा अर्थात अगर ऐडवोकेट वकील हुआ तो वह अगर वो प्रयास करे तो जज तक भी बन सकता है अध्यापक, प्रोफेसर है तो डायरेक्टर, वाइस चांसलर बन सकता है कहने का तात्पर्य यह है कि जातक किसी प्रोफेशन में हो तो अगर कुछ मेहनत करे तो उसका भाग्य उसे चार कदम और आगे ले जाएगा।*
*शास्त्र कहते हैं नवमस्थ चंद्रमा वाला जातक यात्राएं ज्यादा करता है जो कुछ हद तक संभव है लेकिन ज्यादा नहीं क्यों कि यहां दशाएं भी अपना रोल अदा करेंगी जातक लौकिक यात्रा अर्थात इधर-उधर जाना, तीर्थाटन करना कुछ हद तक हो सकता है लेकिन ज्यादा नहीं। क्यों यात्रा वह महीने दो महीने या छह महीने में करेगा कार्य स्थल दूर है तो उसे यात्रा नहीं कह सकते लेकिन जातक यात्रा का शौकीन अवश्य होता है और उसको लंबी यात्रा करने के बाद उसे और परिवार वालों को हमेशा लाभ मिलता है वो लाभ चाहे धन, काम का हो या सेहत शरीर का*
*ध्यान से विचार करें कि चंद्रमा मन का कारक है और किसी कारण वश दूषित अशुभ हो रहा है और यात्रा भाव में बैठा है, ध्यान से देखने पर पता चलता है कि जातक मानसिक यात्राएं बहुत ही ज्यादा करेगा अर्थात अपने स्मरण में दिमाग अपनी सोच में ही से इधर उधर घुमता फिरता रहेगा तृतीय भाव पर दृष्टि है तो आनलाइन यात्रा करने वाला हो सकता है। फोन पर जगह देखेगा और मन ही मन अपने को वहां फिट कर देगा।और घंटों काल्पनिक यात्राएं करता रहेगा और तो और वह कल्पनाओं में गाने भी गाएगा।*
*मैं और मेरी तनहाई*
*अक्सर ये बातें करते हैं।*
*तू होती तो ऐसा होता*
*तू होती तो वैसा होता।*
*कल्पनाओं*
*में वह कहीं भी आ जा सकता है।*
*वह भी अति तीव्र गति से*
*क्यों कि मन की गति का कोई अनुमान नहीं लगा सकता। वह विदेश भी चला जाएगा और तैर कर समुद्र पार भी चला जाएगा लेकिन सिर्फ और सिर्फ अपनी कल्पनाओं में यानी मन से दिल दिमाग़ से*
*लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के अनुसार चन्द्र का खाना नं 9 में होना हर प्रकार से चंद्रमा के मित्र बृहस्पति की मिल्कियत है। अतः जब चंद्रमा घर नं. 9 में होगा तो उसमें हर प्रकार से चंद्रमा और बृहस्पति के गुण मौजूद होंगे। ऐसा व्यक्ति शराफतपसंद, नेक दिल और सबका भला चाहने वाला होता है। धर्म-कर्म, तीर्थयात्रा और शुभ कामों में रुचि रखने वाला होता है। दीर्घायु होता है। यदि पांचवें घर से मित्र ग्रहों की मदद प्राप्त हो तो पुत्र सुख में वृद्धि और धर्म के कार्यों में रुचि बढेगी। यदि तीसरे घर में सहायक या मित्र ग्रह होंगे तो धन दौलत में बरकत होगी।*
*घर नं 9 के चंद्रमा को "घड़े बराबर मोती" और "दुनिया का रक्षक समुद्र' कहकर पुकारा गया है। इस घर में चंद्रमा होने से व्यक्ति गणित में निपुण होता है।*
*घर नं. 9 के चंद्रमा के समय जब घर नं. 9 में कोई मित्र ग्रह हो तो ऐसे व्यक्ति के भाग्य अति शुभ होता है। ऐसे व्यक्ति को माता-पिता का सुख लंबी उम्र तक प्राप्त होता है। जब घर नं. 9 के चंद्रमा के साथ बृहस्पति हो या दृष्टि से संबंध बनाए तो ऐसा व्यक्ति गरीब घर में जन्म लेकर भी अपनी एक विशेष पहचान स्थापित करता है।*
*यदि घर नं. 9 के चंद्रमा के साथ किसी प्रकार भी राहु का संबंध बने तो व्यक्ति की अक्ल धोखा खा जाती है ओर वो जातक अक्ल का अंधा भी बन जाता है जिस कारण वह अपने अच्छे बुरे की पहचान नहीं कर पाता। चंद्रमा घर नं. 9 के समय यदि केतु घर नं. 2 में हो और बुध घर नं. पांच में हो तो व्यक्ति की 48 साल तक की उम्र के लिए अशुभ होते हैं दुनियां उसके रिश्तेदार, आस पास वाले उसको यूज करते हैं*
*चंद्रमा घर नं. 9 के समय यदि शुक्र घर न. 3 में हो तो माता की आखों की ज्योति के लिए बुरा रहे, उसकी मां किसी न किसी कारण वश दुःखी रहती है*
*चंद्रमा घर नं. 9 के समय यदि घर नं. 4 में राहु, केतु या शनि हो, तो व्यक्ति संतान की ओर से मां और अपने मन से दुःखी रहे।*
*उपाय*
*1. मां और बुजुर्गों की सेवा करें, उनका आशीर्वाद ले, बृहस्पति चंद्र शुभ होगा।*
*2. मजदूर को खुश करना चाहिए, दूध पिलाएं या दूध से बनी चीजें खिलाएं*
*3. सापों के स्थान पर दूध रख कर आना चाहिए या मछलियों को चावल डालने चाहिएं।*
*नौवें घर में दो ग्रहों का फल*
*चंद्रमा + मंगल: नौवें घर में चंद्रमा मंगल की युति वाले व्यक्ति की औलाद उत्तम होगी। ऐसा जातक गलत तरीकों से धन कमाकर भी भाग्यवान हो सकता है। यदि इस युति पर राहु, केतु या शनि की दृष्टि हो तो व्यक्ति की मृत्यु किसी दुर्घटना में भी हो सकती है या लंबी बीमारी भी हो सकती है*
*चंद्रमा + शनि : नौवें घर में चंद्रमा शनि की युति व्यक्ति के धन दौलत पर कोई अशुभ असर नहीं डालती। माता की सेहत के लिए अशुभ है। कई बार यह युति व्यक्ति के लिए चर्म रोग का कारण भी बन सकती है, शरीर पर छाले दाग आदि हो सकते हैं। यदि इस युति के समय राशि के कारण फल अशुभ हो रहा हो या इन पर राहु या केतु की दृष्टि हो तो दूध में ज़हर जैसा असर होगा यानी चंद्रमा का फल अशुभ आप दुःखी, माता दुःखी या परेशानियों के साथ*
*चंद्रमा + राहु : नौवें घर में चंद्रमा राहु की युति के समय चंद्रमा का फल आधा रह जाएगा। ऐसे व्यक्ति के जद्दी घर-परिवार में रौनक होगी और सूखे कुओं में भी दोबारा पानी फिर से आ जाएगा। लेकिन चंद्रमा का फल मध्यम रह जाएगा यानी व्यक्ति की माता और उसके अपने मन की शांति के लिए अशुभ , चोट, कष्ट, परेशानी*
*राम राम जी*
*ध्यान से समझें*
*याद रखें कि जीवन एक शतरंज के खेल की तरह है,आपके द्वारा उठाये गए कदम आप कभी वापिस नहीं ले सकते लेकिन आप अपने आने वाले अगले कदम बहुत अच्छे और बेहतर बना सकते हैं...*
*आप सभी जन केवल अपने अपने कर्म पर ध्यान दें कि आप क्या करते हैं क्या सुनते हैं क्या देखते हैं और किसकी संगत में है इस पर विचार करें*
और अपनी अपनी जन्मकुंडली के ग्रह, नक्षत्र, राशि भाव, दशा महादशा के अनुसार अपने अपने उपाय, परहेज़ दान, पूजा पाठ जप दान समय समय पर करते करवाते रहें इन्हे कभी भी न भूलें*
*राम राम जी*
*Astropawankv*
*आज के लिए इतना ही काफी बाकी बातें फिर कभी......*
*Astropawankv*
*Let The Star's Guide You*
*Scientific Astrology & Vastu Research Astrologer Pawan Kumar Verma (B.A.,D.P.I.,LL.B.) Astro. Research Centre Ludhiana Punjab Bharat Phone number 9417311379 , 7888477223. www.astropawankv.com*


