*चंद्रमा+अष्टम भाव
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*चंद्रमा मातृत्व का कारक ग्रह है।*
*चंद्रमा+अष्टम भाव *
*चन्द्रमा मनसो जातः*
*शास्त्रों में, ऋषियों ने जिस विराट पुरुष परमात्मा की कल्पना व आराधना की है उनके अनुसार चन्द्रमा का प्राकट्य उनके मन से हुआ, इसलिए चन्द्रमा को मन का कारक कहा गया है।*
*और हम ताउम्र इसी के पीछे भागते रहते हैं, अपनी बुद्धि रूपी लगाम लगा कर।*
*आत्मा परमात्मा का अंश है और मन अर्थात चन्द्रमा उनके मन से निकला है।*
*उस मन को जब आत्मा साधती है तो जीवन में ठहराव आता है, और जब बुद्धि साधती है तो भटकाव आता है।*
*मन को बुद्धि के पीछे ज्यादा न भटका कर यदि हम सात्विक कार्यों का निर्वहन करते हुए जीवन यापन करें तो हमारी अन्तिम परिणीती अच्छी होगी।*
*हम हर क्षेत्र में कामयाब होंगे।*
*लेकिन यहां बुद्धि मन को भटकाती अवश्य है और भटकाव भी सम्भव है, तो परिणाम भी उसीअनुसार ही सामने आ जाता है।*
*इसी लिए कहा भी गया है कि मन जीते जग जीत।*
*अष्टम में चन्द्रमा को अष्टमेश का दोष तो लगेगा नहीं, क्यों कि सहचर्य के नियम अनुसार इसकी दुसरी राशि नहीं है , तो यह फल सिर्फ अष्टम का करेगा लेकिन अष्टम में बैठ कर चतुर्थ घर पर भी अपना प्रभाव अवश्य देता है कष्ट परेशानियां देता है*
*पौराणिक शास्त्रकारों ने चन्द्रमा को अष्टम में ज्यादा अच्छा नहीं कहा क्योंकि यह यहां से अलग अलग प्रकार के रोग कष्ट परेशानी देता है।*
*जातक श्वास रोगी, अल्पायु ,क्रोधी ,निर्दयी,धन हीन, व्याकुल मन वाला,पाप बुद्धि वाला, दुर्बल अंग वाला निराशा से भरा हुआ छोटी छोटी बातों से परेशान होने वाला हो सकता है।*
*ये सब चन्द्रमा के पक्ष बल पर निर्भर करेगा।*
*वहीं पक्ष बली हुआ तो, शास्त्र कारों ने इसे अच्छा भी कहा है।*
*जातक खोजी प्रवृत्ति वाला, बुद्धि मान, धनवान, दानवीर, विदेश भ्रमण करने वाला, गुप्त धन ,पैतृक संपत्ति प्राप्त करने वाला हो सकता है।*
*यहां बैठा चन्द्रमा धर्म या कहें कि नवम की हानी अवश्य करेगा।*
*जातक भटकाव के कारण दुराचारी हो सकता है।*
*दुराचार से वह धर्म की हानी करेगा, फल स्वरूप लंबी अवधि वाले रोग पाएगा अति कष्ट प्रद रोग पाता हुआ दुःखी होता हुआ जातक अन्तिम परिणिती को प्राप्त करेगा।*
*अतः दुराचार का त्याग कर सत्कर्मो को करते हुए जीवन यापन करें।*
*ऐसे जातक को शिव आराधना अवश्य करनी चाहिए।*
*शुभ चंद्रमा अष्टम में आयुष्कारक होता है।*
*अष्टम भाव पैतृक संपत्ति, उत्तराधिकार में मिलने वाली संपत्ति का भाव भी है लेकिन वो उसका पूर्ण रूप से सुख प्राप्त नहीं कर पाता*
*किसी जातिका ने गर्भ धारण किया हो या फिर संतान होने वाली हो उस का खास ध्यान रखना चाहिए।*
*उसकी होने वाली संतान को हानि पहुंचाई जा सकती है।*
*कोई तंत्र मंत्र उन दोनों पर किया जा सकता है।*
*सामुहिक परिवारों में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है।*
*ईष्र्या वश परिवार का ही कोई व्यक्ति यंत्र मंत्र तंत्र करवा देता है।*
*जिसके कारण से वो जातक और उसका परिवार पूरी आयु यानि वो परिवार अपने जीवन काल में कष्ट परेशानियों वाला जीवन जीता रहता है और उसको इस कारण एक प्रकार से भटकाव में ही भटकता रहता है*
*पौराणिक ग्रंथों में भी इसके उदाहरण मिलते हैं।*
*कई बार राज्य के होने वाले उत्तराधिकारी कोउसके जन्म से पहले या जन्म लेते ही मरवा दिया जाता था।*
*अगर होने वाले शिशु से किसी प्रकार की हानी की आशंका हो तो उसे मार दिया जाता था या मरवा दिया जाता था।*
*उदाहरणार्थ कंस को देख सकते हैं किस प्रकार से उसने देवकी की संतानों को मारा।*
*अष्टम भाव में चंद्रमा होने पर.....*
*अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा व्यक्ति को एक गहरी भावनात्मक समझ प्रदान करता है। ऐसे लोग केवल शब्द नहीं सुनते, बल्कि सामने वाले के मन की अनकही भावनाओं को भी महसूस कर लेते हैं। जहाँ दूसरे लोगों को किसी व्यक्ति को समझने में समय लगता है, वहीं ये लोग थोड़ी-सी बातचीत में ही उनके मन की स्थिति को पहचान लेते हैं*
*इसी गहरी संवेदनशीलता के कारण ये बहुत अच्छे काउंसलर बन सकते हैं। इनकी बातों में ऐसा अपनापन और समझ होती है कि सामने वाला सहज होकर अपनी भावनाएँ व्यक्त कर पाता है। ये केवल सलाह नहीं देते, बल्कि व्यक्ति के दर्द की जड़ तक पहुँचकर उसे समझने का प्रयास करते हैं और उसका निवारण करने में उनकी सहायता भी करते हैं*
*अष्टम भाव का चंद्रमा व्यक्ति के भीतर स्वाभाविक हीलिंग ऊर्जा भी देता है। ऐसे लोग दूसरों को भावनात्मक रूप से संभालने, उनका आत्मविश्वास लौटाने और कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में मदद करने की क्षमता रखते हैं*
*यदि यह चंद्रमा शुभ प्रभाव में हो, तो यह व्यक्ति की अंतर्ज्ञान (Intuition), मनोवैज्ञानिक समझ और दूसरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता को और भी मजबूत बना देता है*
*चंद्रमा माता का कारक ग्रह है अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा माता के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता है ।*
*जातक अपनी माता से अलगाव की स्थिति का सामना करेगा या जातक को अपनी माता का सुख कम होगा। कई बार विद्या प्राप्त करने में परेशानी रूकावटें आती हैं अगर विद्या प्राप्त हो जाए तो माता के सुख में कष्ट परेशानी होती है*
*जातक अपनी माता के स्वास्थ्य से परेशान रहेगा।*
*चंद्रमा अष्टम भाव में जातक को दयालु बनाता है। साथ ही जातक आध्यात्मिक व्यक्ति होगा। जातक आराम से जिंदगी जीना पसंद करेगा पर द्वंद्व उस के जीवन में बना रहेगा*
*अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा जातक को रूपवती पत्नी देता है जो बुद्धिमान और ज्ञानवान होगी।*
*जातक को अपने व्यवहार के अनुकूल पत्नी प्राप्त होगी*
*यदि चंद्रमा अष्टम भाव में पीड़ित हो तब यह जातक के जीवनसाथी का स्वास्थ्य खराब कर सकता है।*
*चंद्रमा अष्टम भाव से अपनी पूर्ण दृष्टि दुसरे भाव पर डालता है अतः जातक देखने में सुंदर और मीठा वचन बोलने वाला विद्वान व्यक्ति हो सकता है*
*जातक हंसमुख प्रवृत्ति का होगा लेकिन कभी-कभी यह जातक को अपमानजनक स्थिति और जग हंसाई का सामना भी करवा सकता है।*
*अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा जातक के स्वास्थ्य को कमजोर कर सकता है ।*
*अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा जातक को मानसिक परेशानी देता है क्योंकि चंद्रमा मन का कारक ग्रह है।*
*चंद्रमा एक जलीय तत्व का ग्रह है अतः अष्टम भाव में चंद्रमा जातक को कफ दोष दे सकता है।*
*चंद्रमा हमारे पाचन तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है अतः अष्टम भाव में चंद्रमा जातक के पाचन तंत्र को कमजोर कर सकता है जिसके कारण जातक पेट से संबंधित समस्या से पीड़ित रह सकता है।*
*अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा जातक को आंतों से संबंधित समस्या दे सकता है ।*
*अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा जातक को फेफड़ों से संबंधित समस्या दे सकता है जिसके कारण जातक को श्वास लेने में दिक्कत हो सकती है ।*
*अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा जातक की नेत्र शक्ति को कमजोर करता है। ओवरऑल अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा क्या रिजल्ट देगा, यह चंद्रमा की राशि और नक्षत्र पर निर्भर करता है।*
*अष्टम भाव मृत्यु भाव के रूप में जाना जाता है, यदि बली चंद्रमा अष्टम भाव में अवस्थित हो जातक की आयु अच्छी होती है।*
*लेकिन यदि अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा कमजोर हो तब जातक मध्यम आयु या अल्पायु का हो सकता है।*
*अष्टम भाव का चंद्रमा बालारिष्ट योग दोष का निर्माण करता है। जातक दुबला पतला और कमजोर कद काठी का हो सकता है।*
*चंद्रमा मन का कारक ग्रह होता है।*
*अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा जातक के आत्मविश्वास में कमी कर सकता है।*
*जातक मानसिक परेशानी से घिरा रह सकता है ।*
*कभी कभी सब कुछ होते हुए भी जातक असंतुष्ट रहेगा ।*
*उच्च पद पर रहते हुए भी संतुष्टि की कमी।*
*उसके मन में अनिश्चित भय हो सकता है। जातक बुद्धिमान होगा पर अपने भय पर काबू न रख पाने के कारण परेशान रहेगा और अपने मस्तिष्क का सदुपयोग नहीं कर पाएगा।*
*अष्टम भाव गुह्य भाव तो है ही साथ में इसे श्मशान भी कहा जाता है और ठहरा पानी जो खराब है पीने लायक नहीं है, गंदा पानी, खारा जहरीला और शमशान का पानी।*
*काल पुरुष कि कुंडली का चतुर्थ का स्वामी चन्द्रमा जो निर्मल बहता जल है,*
*अष्टम में आकर अपने आप को बंधन में महसूस करता है, मानसिक तौर पर।*
*कुछ मायनों में तो यह अच्छा जैसे रिसर्च, ज्योतिष, वकालत, टीचिंग, आयुर्वेद डाक्टरी इत्यादि।*
*लेकिन अगर जातक इन सब कामों में नहीं है तो मानसिक तौर पर विक्षप्त भी हो सकता है।*
*साधारण भाषा में कहें तो उसे पागल पन के दौरे यदा कदा पड़ सकते हैं।*
*जातक को यदा कदा सुसाइडल विचार भी आने की संभावना रहती है।*
*उसे ऐसा आभास हो सकता है कि उस पर किसी ने कुछ किया कराया है।*
*चंद्रमा अगर अष्टम में होगा तो ऐसे में पेट से जुड़ी हुई परेशानियां हो सकती हैं*
*ऐसे लोगों को मानसिक परेशानियां बहुत जल्दी हो जाती हैं*
*यात्रा में परेशानी हो सकती है*
*मां के साथ तालमेल प्यार की कमी हो सकती है*
*चंद्रमा अगर बुरे प्रभाव में आ जाए तो ऐसे लोगो के विचार सुसाइड करने वाले भी हो सकते हैं*
*मेडिकल ,आयुर्वैदिक, देसी घरेलू नुस्खे का ज्ञान या फिर किसी भी प्रकार के ज्ञान देने वाले में भी बन सकते हैं*
*आज के लिए इतना ही.. ... बाकी का फिर कभी....
*Astropawankv*
*Let The Star's Guide You*
*Scientific Astrology & Vastu Research Astrologer Pawan Kumar Verma (B.A.,D.P.I.,LL.B.) Astro. Research Centre Ludhiana Punjab Bharat Phone number 9417311379 www.astropawankv.com*




