Translate

Friday, 7 November 2014

लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में गुरु ग्रह का फल .....

 लाल  किताब  के  रहस्यमयी  ज्ञान में गुरु ग्रह का फल .....
पिछले कुछ समय से मैं आपसे लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के बारे में विचार बिमर्श कर रहा हु आज आपके साथ उसी रहस्यमयी ज्ञान का  एक और रहस्य आपके साथ साँझा कर रहा हु जिसमे आप जानेंगे कि लाल किताब के इस रहस्यमयी ज्ञान में ग्रहो के बारे में खानाबार क्या रहस्य छिपा हुआ है    
आज हम आपको बतायेगे कि अगर आपकी जन्मकुंडली में गुरु ग्रह खाना नंबर १ में हो तो लाल किताब का रहस्यमयी ज्ञान क्या कहता है   सबसे पहले आप जाने कि लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में गुरु ग्रह को किस -किस नाम  से पुकारा गया है लाल किताब के इस रहस्यमयी ज्ञान में गुरु ग्रह को   सुनार ,गद्दी पर बैठा साधु ,बाबा ,पिता  और पुत्र   ( गुरु और सूर्य ) शेर ,पीला  रंग या पीले रंग की चीजों के कारोवार  पूजा स्थान , मंदिर/धर्म स्थान,  हल्दी ,सोना ,केसर ,दाल चना ,मुर्गा ,पीपल ,पुजारी ,जगत गुरु ,बृद्ध सांस ,हवा .......इत्यादि कहा गया है .     
लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के अनुसार ऐसा जातक  जिस की कुंडली के खाना नंबर १ में गुरु ग्रह बिराजमान  हो  तो वो जातक बहुत ही गुस्सा करने वाला होने पर भी साफ़ ,तबियत और नेक व्यक्ति होता हैलेकिन फलादेश से पहले देख ले कि   गुरु ग्रह के पक्के घरो में उसके शत्रु ग्रह  तो नहीं बैठे है अगर बैठे है   तो गुरु ग्रह के शुभ प्रभाव में कमी आ जाती है हमे पहले यह पता होना चाहिए कि गुरु ग्रह के पक्के घर कौन  कौन  से  है और गुरु ग्रह के शत्रु और मित्र  कोन कोन   से ग्रह है तो गुरु ग्रह के (२-५-९-१२ ) दूसरा ,पांचवा नौवां ,और बहरवां  पक्के घर  है और इस ग्रह के शत्रु ग्रह बुध ,शुक्र और राहु है और इसी तरह  से गुरु ग्रह के मित्र ग्रह सूर्य ,चन्द्र और मंगल है जब  गुरु ग्रह किसी   की भी कुंडली में  अपने मित्र ग्रहों के साथ या उनकी शुभ दृस्टि में हो तो शुभ फल में वृद्धि करता है और जब अपने शत्रु ग्रहों के साथ या दृष्टि में हो तो अशुभ  फल में वृद्धि करता है   इसलिए सर्वप्रथम यह देखना बहुत ही जरुरी होता है कि गुरु ग्रह की कुंडली में स्थिति क्या है  और उस पर कौन कौन से ग्रहों की दृष्टियां पढ़ रही है और वो आप कौन कौन से ग्रहों पर  अपनी दृष्टि से देख रहा  है   वो शुभ है या अशुभ है इत्यादि बहुत सी और ऐसी बातें है जिन्हे  कुंडली में फलादेश करने से पहले देखना जरुरी होता है

.तो हम बात कर रहे थे कि लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में खाना नंबर १ में गुरु ग्रह का ..इस रहस्यमयी लाल किताब में सभी  ग्रहों  का फल दो प्रकार से बताया गया है शुभ / नेक फल क्या होगा   और अशुभ/ मंदा फल क्या होगा
लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में गुरु ग्रह का खाना नंबर १ में  होने पर वो जातक  गुस्सा करने वाला होने पर भी साफ़ ,तबियत नेक दिल और अपने मन  में किसी के साथ बहस या लड़ाई होने पर भी मन में बुराई न रखेगा और उसका माथा खुला (चोड़ा)   होगा  उसके अपने घर के पास या उसके जद्दी घर के पास गुरु ग्रह की चीजें  जरूर होगी  और उसकी आर्थिक सिथति उसकी आयु के साथ साथ बढ़ती जाएगी उसकी शिक्षा में रुकबाट जरूर आएँगी बहाना चाहे कोई भी बने  वो जातक   धर्म पर , परमात्मा पर भरोसा करने वाला होगा .और  उसे समाज में सम्मान प्राप्त होगा वो व्यक्ति अपनी किस्मत को अपनी दिमागी शक्ति से और राजदरवारी या उच्च लोगो के साथ से अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ेगा और शादी के बाद उसकी किस्मत जागना  शुरू हो जाएगी वैसे वो जातक  जिसकी  कुंडली के खाना नंबर १ में गुरु हो उस जातक के अंदर उसकी 16 साल  की आयु से ही परिवार  को  सँभालने की शक्ति  पैदा होगी   उसकी आयु बढ़ने के साथ साथ उसके अपने उसके घर परिवार के हालात में सुधार  आता जायेगा और वो व्यक्ति तरक्की  करता जायेगा वो कई तरह  के इल्मो का जानकार होगा उसके शत्रु  उसके ऊपर  सामने से बार नहीं करेंगे  लेकिन पीठ पीछे से बार करते  रहेंगे यानि उसके शत्रु उस से दब  कर  रहेंगे लेकिन  गुप्त शत्रु जरूर होंगे  चाहे वो बाहर के हो या अपने हो पर होंगे जरूर जो उसकी तरक्की से अंदर ही अंदर जलेंगे . वो जातक कभी भी निकम्मा और शक्की बददिमाग न होगा .सभी लोग   उसका आदर   करंगे   और  वो जातक  अपनी २७ साला उम्र में अपने पिता से अलग होगा या अलग  कोई कारोवार या कमाई  का साधन   जरूर बना  लेगा  अपनी कमाई  से ऊँचा मकान जरूर बनाएगा  और हो सकता है जब उस  जातक को पुत्र रत्न  प्राप्त  हो या वो अपना मकान बना ले तो उसके पिता पर इसका बुरा असर होगा और उनकी सेहत चिंता का कारण  बन  सकती  है  ऐसे  जातक  के   एक बच्चे की पैदाइश के बाद उसके दूसरे  बच्चे की उम्र में  आठ  साल ज्यादा फर्क  न होगा अगर ऐसा   हुआ  तो आगे औलाद न होगी और उसका हर ७  या ८   बा  साल  तरक्की   का न होगा     और अगर गुरु ग्रह पहले घर में हो और ८  बे घर में राहु हो या  गुरु ग्रह दूषित  हो  रहा हो  और  फिर उसने अपनी कमाई से किसी की शादी कर दी हो या मकान बना लिया हो तो पिता को सेहत के लिए  काफी परेशनी उठानी होगी  या हो सकता है कि उनकी मृत्यु  बीमार  होने से हो . अगर कुंडली में चन्द्र ग्रह अछा हो यानि शुभ हो तो वो जातक अछा ऑफिसर भी हो सकता है    और कुंडली  में चन्द्र ,मंगल दोनों ही शुभ हो तो उसके घर परिवार में हर तरह की सुख ऐशो आराम बढ़ते  जायेंगे और उसको जमीन जायदाद का सुख मिलेगा  बुजुर्गो से विरासत में हिस्सा मिलेगा इत्यादि ... अगर जाने -अनजाने में उस व्यक्ति ने कुछ ऐसे कर्म कर लिए जिस से गुरु ग्रह दूषित हो रहा हो तो जन्मकुंडली में शुभ होकर बैठा हुआ गुरु भी अशुभ फल देने लग जायेगा और  उपरोक्त फलों में बहुत कमी आ जाएगी और उस जातक को पता भी न चलेगा कि ऐसा क्यों हो रहा है   लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में    आता है कि गुरु अगर लगन में हो और फिर भी जातक को कष्ट आ रहे हो तो अपनी  ही गलतियां (कर्म ) होगी जो कि उसके पतन  की कारक होगी . जिस कारण से उसे लगेगा कि लोग अपने फायदे के लिए उसका इस्तेमाल करते है उसकी कोई कदर नहीं करता वो अपने अंदर ही अंदर परेशान रहता होगा उसको बदनामी  और  क़र्ज़ का  डर सताता होगा  और वो हर समय छोटी छोटी बात पर गुस्सा बहस करता होगा उसका चरित्र भी भरोसा करने के लायक न होगा और  उसकी सेहत ठीक नहीं रहती होगी और    उसकी बहिन बुआ या मासी दुखी या परेशान होगी और परिवार में किसी का विवाहित जीवन ख़राब होगा  उसके सर के  बाल छोटी उम्र में ही सफ़ेद होने लगेंगे घर में किसी को सांस ,छाती या दिल की बीमारी भी होने का डर होगा  उस जातक का मन  शांत न होगा और वो कभी  कभी  शांति  के लिए  सन्यासी  बनने  की तरफ  को जाता  होगा या उसको  घर बार छोड़ने  या भागने  को मन करता होगा अगर गुरु ग्रह अशुभ हो या अशुभ हो रहा हो तो ऐसा व्यक्ति लोगो की नौकरी  (गुलामी ) करेगा  और दिमागी /मानसिक  रूप  से व्यक्ति परेशान रहता होगा  सब कुछ होते हुए भी वो निराशा सी ज़िंदगी काट रहा होगा ऐसे  और  भी बहुत  से  रहस्य लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में छिपे हुए है लेकिन इसमें लिखा गया है कि कुंडली में केवल एक ग्रह को देखकर फलित करना गलत होगा इसलिए जन्मकुंडली के सभी  ग्रहो को देख कर उन्हें लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के व्याकरण / फरमानों को समझ कर ही फलित करना होगा तभी इसके रहस्य समझ में आएंगे ....
अगर वो जातक अपने कर्मो को और अपने खानपान को ठीक कर ले तो वो गुरु ग्रह के अशुभ फल से बच सकता है जैसे वो केसर का तिलक लगाये  मीट -शराब  अंडा से दूर रहे  और कभी कभी नारियल या बादाम तेज चलते पानी में बहा दिया करे  नाक में चांदी  डालकर बुध के दोष से बचे  मंगल ग्रह की या शुक्र ग्रह की चीजें जमीन में दवाये गाये की  सेवा करे और अपनी पत्नी को पूरा मान- सम्मान दे  इत्यादि ....आज के लिए इतना ही बाकि फिर कभी ..अंत में फिर आपसे कहूँगा कि इस  लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान को पाने के लिए सबसे पहले अपने -अपने गुरुओं ,देवी - देवताओं को नमस्कार करे और उनसे प्रार्थना करे ताकि उन सभी की कृपा से आपको इस ज्ञान की समझ आने लगे ...

Saturday, 11 October 2014

क्या कहती है लाल किताब.....( व्याकरण )

क्या कहती है  लाल किताब..
आज मैं आपसे फिर लाल किताब पर चर्चा  करने जा रहा हु  पिछले कुछ दिन से मैं आपसे ज्योतिष की रहस्यमयी लाल किताब के व्याकरण पर आपसे विचार विमर्श कर रहा हु जोकि लाल किताब के फरमान नंबर ५ से १४ तक है और जिसमे बहुत से रहस्य ,सूत्र ,और इशारे है जिन्हे पढ़े बिना या समझे बिना लाल किताब का सारा का सारा ज्ञान और इसका रहस्यमयी ज्ञान किसी की भी समझ नहीं आ सकता हैं. क्युकी फरमान नंबर ६ मैं  पंडित जी ने हमे समझने के लिए ऐसी बहुत  रहस्यमयी बातें  और सूत्र और इशारे  किये हैं जिन्हे हमे बहुत ही ध्यान से समझना होगा ...
उन्होंने फरमान नंबर ६ में लिखा है कि...
धर्म  दया ख्वाह कोसो ऊँची , ख्वाह ही सखी लख दात्ता हो ,
उलटे वक़्त खुद गाँठ आ लगती , लेख लिखता था बिधाता जो.

फरमान नंबर ६ में पंडित जी ने हमे ग्रहो के बारे में और कुंडली के खानो के बारे में और उनकी दोस्ती -दुश्मनी उंच या नीच उनकी खास खास मियादो और ग्रहो की खास खास किस्मो व् कुंडली में ग्रहो के पक्के घर हथेली पर ग्रहो के  पक्के घर व् हथेली पर बुर्ज के पक्के घर और दरमियानी ग्रह व् ग्रहो की उम्र का असर व् रियायती चालीस दिन ,ताकत टकराओ या बरतायो  और यह भी समझाने की कोशिश की है कि कौन सा ग्रह ग्रह फल का या राशि फल का इसके साथ ही ३५ साला चककर व् जनम दिन और जनम वक़्त का ग्रह और एक दिन में ग्रह का वक़्त और जनम दिन और जन्म वक़्त  के ग्रह का आपसी तालुक और इसके साथ ही हमे अंधे ग्रहो के बारे में नहोराता के ग्रह ,धर्र्मी ग्रह ,साथी ग्रह ,बिलमुकाबिल के ग्रह कायम  ग्रह ,ग्रह का घर ,दोस्त-दुश्मन ग्रह ,,उच्च ग्रह नीच ग्रह बराबर के ग्रह और बालिग-नाबालिग ग्रह  और सबसे खास बात हमे यह भी समझाया है कि  जब कुंडली में दुश्मनी के वक़्त मंदा असर होने के वक़्त ग्रहो की क़ुरबानी के बकरे इत्यादि ...
 ..लाल किताब  के  रहस्यमयी ज्योतिष ज्ञान के फरमान नंबर ६ में लिखी बातों यानि लिखे हुए ज्ञान को हम एक एक करके समझने का प्रयास करंगे आज हम इस फरमान नंबर ६ में दिए गए कुंडली में ग्रहो के पक्के घर और ग्रहो की खास खास किस्मो के बारे में चर्चा करेंगे ..

      
१. -कुंडली में ग्रहो के पक्के घर व्  ग्रहों की किस्में.........
लाल किताब के रहस्यमयी ज्योतिष ज्ञान के इस फरमान नंबर ६ में पंडित जी ने हमे बहुत ही प्यार और तफ्सील से हमे समझाने की कोशिश की है जैसे  हम लाल किताब ज्योतिष कुंडली में ग्रहो के पक्के घरो की ही ले ले तो हमे बताया है कि  कुंडली के खाना नंबर १ सूर्य का पक्का घर  है और खाना  नंबर २-५-९-११ गुरु ग्रह के पक्के घर है और खाना नंबर ३ मंगल ग्रह का और खाना नंबर ४ चन्द्र्र  ग्रह का ,खाना नंबर ६ केतु ग्रह का और खाना नंबर ७ बुध और शुक्र ग्रह का और खाना नंबर ८ शनि  और मंगल ग्रह का  और खाना नंबर १० शनि ग्रह का और खाना नंबर १२ राहु ग्रह का पक्का घर है. इसको हमे हमेशा के लिए याद रखना होगा तभी इस लाल किताब के ज्योतिष ज्ञान को हम कुछ हद तक समझ पाएंगे  और साथ ही साथ हमे  ग्रहो की किस्मो में यह भी बताया है कि गुरु ,सूर्य और मंगल ग्रहो को नर ग्रह भी कहते है और शुक्र्र और चन्द्र्र ग्रह को स्त्री ग्रह भी कहते है और शुक्र्र को लक्ष्मी और चन्द्र्र को माता के नाम से भी जाना जाता है राहु और केतु को पाप के नाम से जाना जाता है और जब शनि को राहु या केतु किसी भी तरह आ मिले तो शनि पापी  होगा और शनि,राहु,केतु,को इकठ्ठा नाम भी पापी ही है और बुध ग्रह को नंपुसक ग्रह माना है  अब अगर कही भी लाल किताब के रहस्यमयी ज्योतिष ज्ञान में नर ग्रह का जिक्र आता है तो हमे  गुरु ,सूर्य और मंगल ग्रह की और ध्यान देना होगा और अगर स्त्री ग्रह का जिक्र होता है तो याद रखना होगा कि शुक्र ग्रह और चन्द्र ग्रह का जिकर हो रहा है लेकिन मंगल ग्रह का एक और ध्यान देना होगा की इस ग्रह के दो रूप बताये है मंगल नेक और मंगल बढ़  ( जिसका हम आगे के लेखो मैं जिक्र करंगे कि कैसे मंगल नेक और बढ़ होता है ) और ऐसे ही कही अगर शुक्र की बात हो तो  स्त्री ,लक्ष्मी ,गाये, मिटटी इत्यादि  को याद रखना होगा
पंडित जी ने  बहुत ही प्यार से लिखा है कि..
गुरु ,रवि ,और मंगल तीनो , नर ग्रह भी कहलाते है .
शनि ,राहु और केतु तीनो , पापी ग्रह बन जाते है.
शुक्र ,लक्ष्मी, चन्द्र माता,  दोनों स्त्री होते है.
बुध मुखन्नस चक्कर सभी का , जिसमे सब ये घूमते है.
नेकी बद्दी दो मंगल भाई ,शहद जहर दो मिलते है.
बढ़ लालच गर मारे दुनिया , नेक दान को गिनते है
इतना सा लिख कर हमे पंडित जी ने बहुत से रहस्यों को समझाने का प्रयास किया है अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आप पाएंगे कि उपरोक्त लिखे हुए मैं हमे ग्रहो की पूरी कहानी समझने पर मजबूर किया है बहुत कुछ लिख कर और बहुत कुछ न लिख कर मात्र इशारों से समझाने का प्रयास किया है जिसे हमे बहुत ही गहराई से समझना होगा .समझदार व्यक्ति के लिए तो इशारा  ही काफी होता है   ............ अगर हम ध्यान से देखे तो आपको लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के फरमान नंबर ६ में कुल दो हाथों के चित्र जिसमे की ग्रहो और राशिओं  को समझाया गया है और एक कुंडली का चित्र जिसमे की ग्रहो के  पक्के घर और कुल दस सारिणी है जिनमे बहुत सी ज्ञान की बाते  रहस्य समझाए है   और इन रहस्यों को समझे बिना लाल किताब आपके लिए मात्र एक कोरी ज्योतिष की किताब रह  जाएगी और आपको लाल किताब के रहस्यमयी ज्योतिष ज्ञान की कुछ भी समझ नहीं आएगी   आज के लिए बस इतना ही बाकि फिर कभी ......तो याद रखे हमेशा  कि सबसे पहले अपने देवी -देवताओं और अपने गुरुओं को चरणवंदना करके आशिर्बाद लेकर इस ज्ञान को समझने का प्रयास करें ....     क्या कहती है लाल किताब......

Monday, 4 August 2014

क्या कहती हे लाल किताब ...

क्या कहती हे लाल किताब ...
खुद इंसान की पेश न जावे , हुकम  विधाता होता है .
सुख दौलत और सांस आखरी , उम्र का फैसला होता है .
बीमारी का इलाज है ,मगर मौत का कोई इलाज नहीं - दुनियावी हिसाब किताब है , कोई दाव्  ए    -खुदाई नहीं .
क्या कहती हे लाल किताब ...
पिछले कुछ दिनों से में आपसे  लाल किताब ज्योतिष के ज्योतिष ज्ञान पर विचार विमर्श कर रहा हु कि क्या है लाल किताब का ज्योतिष ज्ञान ....तो आज हम उसी पर आगे बात करते है .लाल  किताब का ज्योतिष ज्ञान हमारे प्राचीन ज्योतिष ज्ञान से कुछ भिन्न है मैंने आपको यह बात पहले भी बताई थी .पंडित जी ने बड़े ही प्यार से हमे समझाते हुए जो लाल किताब १९४२ ( इल्म सामुद्रिक की लाल किताब ...१९४२)    लिखा है कि;-खुद इंसान की पेश न जावे , हुकम  विधाता होता है .
सुख दौलत और सांस आखरी , उम्र का फैसला होता है .
बीमारी का इलाज है ,मगर मौत का कोई इलाज नहीं - दुनियावी हिसाब किताब है , कोई दाव्  ए    -खुदाई नहीं .       
 पिछले लेखो में आपसे बात करते हुए इस बात का जिकर हुआ था  कि  लाल  किताब १९५२ में ज्योतिष का सारा का सारा ज्ञान हमे १८ फरमानों में देने की कोशिश की है .पंडित जी ने बड़े ही प्यार से हमे समझाते हुए लिखा है कि
हाथ रेखा को समंदर गिनते , नज़ूम फलक का काम हुआ .
इल्म कियाफा ज्योतिष मिलते , लाल किताब का नाम हुआ
आगे   लिखा है कि ..
लाल किताब फरमाबे यु -अक्ल लेख से लड़ती क्यों
जबकि
न गिला तदवीर अपनी , न ही खुद तहरीर हो
सबसे उत्तम लेख ग़ैबी , माथे की तक़दीर हो
 इतना सा लिख कर पंडित जी ने हमे एक ऐसा रहस्य समझने के लिए मजबूर कर दिया है जिसमे की उपरोक्त लिखे अनुसार एक सवाल खुद ही करके जवाब में लिखा है कि
न जरुरी नफ़्स ताकत , न ही अंग दरकार हो
लेख चमके जब फकीरी , राजा आ दरबार हो
उपरोक्त  बातों को उन्होंने फरमान नंबर १ लिखने से पहले  लिखा है   लाल किताब के फरमान नंबर १ से पहले कुल ७ पेजों पर उन्होंने हमे बहुत कुछ समझने (लाल किताब के  रहस्मयी  ज्योतिष ज्ञान ) पर जोर दिया है मैं तो आपसे एक ही बात कहूँगा कि जो भी लाल किताब के ज्योतिष ज्ञान में रूचि रखता हो वो इसके एक एक अक्षर को समझने की कोशिश करे क्योकि इस रहस्यमयी लाल किताब के हर एक अक्षर में कई कई रहस्य छिपे हुए है   जैसे  ऊपर लिखा है कि ..
न गिला तदवीर .........
.....माथेकी तक़दीर हो
और न जरूरी नफ़स ...........राजा आ दरबार हो ..
इसमें उन्होंने हमे  इंसान की पूरी ज़िंदगी का  लेखा जोखा ही समझाने का प्रयास किया है जिसमे इंसान की  पूरी ज़िंदगी के सवालो के जवाब सिर्फ अंत में लिखी दो लाइन में ही दे दिया है.
न जरुरी नफ़्स ताकत , न ही अंग दरकार हो 
लेख चमके जब फकीरी , राजा आ दरबार हो
इस तरह से लाल किताब के रहस्य को समझने के लिए हमे इसके एक एक शब्द को बहुत ही बारीकी से समझाना होगा .तभी इसके रहस्य समझ में आने लग जायेंगे ज्योतिष शास्त्रो में लाल किताब का ज्योतिष ज्ञान देखने  में जितना आसान  लगता है उतना है नहीं बल्कि यह बहुत ही रहस्यमयी है जो आम आदमी की पकड़ में नहीं आता है इसलिए ही पंडित जी ने हमे बहुत ही प्यार से  पॉइंट नंबर ३ में .समझाया है कि लाल किताब को शुरू से आखिर तक कई दफा बतौर नावल पढ़ते जाना होगा . तभी इसके भेद हमे मालूम होने लगेंगे.क्यों कहा ऐसा कि नावल के जैसे पढ़ना क्योकि आप ने देखा ,सुना या कभी किसी ने या खुद नावल पढ़ा होगा तो  आपने महसूस किया होगा कि नावल पढ़ने के समय व्यक्ति उसी में खो जाता है उसे आस पास की कोई होश नहीं रहती जैसे आजकल व्यक्ति सिनेमा हाल में कोई मूवी देखते बक्त उसी में खो जाते है .बस इसी कारण से इसे ( लाल किताब ) हमे बार बार  पढ़ने की हिदायत दी है ...          
लाल किताब में व्याकरण  :- लाल किताब  के ज्योतिष ज्ञान में व्याकरण कारक भाव वैदिक  ज्योतिष ज्ञान से   कुछ हटकर अलग तरीके से दिए गए है .जिन्ही अच्छी तरह से समझना और याद करना बहुत जरुरी है क्यूंकि लाल किताब से फलित करते समय  अगर आपको लाल किताब के व्याकरण याद नहीं रही या आपने लाल किताब की  व्याकरण पर ध्यान नहीं दिया तो आप जिस किसी की कुंडली को देख रहे है और फलित कर रहे है और उपाओ  निकाल  रहे है वो सब का सब गलत हो जायेगा और गलत उपाओ से जिस व्यक्ति की कुंडली है उसको  फायदे की वजाए  नुक्सान होगा   लाल किताब की वयाकरण में याद रखने वाली बातों में जैसे १. ग्रहो के कारक भाव  २. ग्रहो की आपस में दोस्ती  /दुश्मनी /समता ३ ग्रहो की आयु ४. ग्रहो की घरो को देखने की ताकत ५. ग्रहो की महादसा ६.ग्रहो के ऋण ७.मस्नूई ग्रह ८. ग्रहो का धोखा ९.घरो का धोखा १०.साथी ग्रह ११.धार्मिक ग्रह १२. रतांध ग्रह 13. अंधे ग्रह १४.शंकित ग्रह १५. प�पापी  ग्रह १६. ग्रहो की एक दूसरे के कारण बलि १७.स्वग्रह १८. कारक ग्रह १९.स्पष्ट ग्रह १९.उच्च ग्रह २०.नीच ग्रह २१ वयस्क / अवयस्क ग्रहो की कुंडली २२. भावो के मध्य दीवार २३. राशि और ग्रह २४.जाग्रत ग्रह व् सोया ग्रह २५. जाग्रत भाव व् सोया भाव २६ ग्रहो की दृष्टियां जैसे सामान्य दृस्टि ,टकराव ,नींव ,सहायता ,विश्वासघात ,अचानक चोट ,साझी दीवार ,अचानक चोट  . ऐसी और भी कई बातें है जो कि लाल किताब को समझने के लिए हमे याद रखनी पड़ेंगी .जिन का मैं  आगे आपसे विचार -विमर्श करूँगा  और आपको बताऊंगा कि क्या कहती है लाल किताब ....
लाल किताब पर बहुत सी किताबे इस समय बाजार में मिल रही है लेकिन उन सबमे लाल किताब में जो लिखा है उसी को घुमा- फिरा  कर लिखा हुआ है सिर्फ शब्दों का हेर-फेर है .किसी ने भी कोशिश नहीं की है कि कोई इसके रहस्य को समझ कर उसे समझाने की कोशिश करे या तो वो किताबे मार्किट में है जिनमे हूबहू लाल किताब को हिंदी में लिखा हो या फिर वो किताबे है जिस में शब्दों के हेर-फेर करके उन्हें अपने नाम से प्रिंट करवा कर मार्किट में बेचने को भेज दिया .फिर भी मैं उन सभी लाल किताब के लेखको और पब्लिशर का तह दिल से शुक्रिया करना चाहता हूँ जिन महानुभावो के कारण लाल किताब आम लोगो के पास पहुँच पायी और आम लोगो को लाल किताब के ज्योतिष ज्ञान का पता चला . 
 मेरी आपसे कोशिश होगी कि में आपको पहले लाल किताब में क्या लिखा है यह बताने का प्रयास करूँगा और फिर कोशीश करूँगा कि जो मैंने इसके यानि लाल किताब के रहस्य जो भी रहस्य आज तक समझ पाया हु वो आप सब को अपने आने बाले लेखो के द्वारा बताने और समझाने की कोशिश करूँगा  और आप सब से यह आशा भी करता हु कि आप सब भी इसमें  मेरा पूरा  पूरा साथ देंगे. मैं कोशिश करूँगा कि लाल किताब  में जो ( रहस्यमयी  ज्योतिष ज्ञान लाल किताब )  कुछ भी लिखा है उन सब को आपके साथ जरूर शेयर करू.