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Thursday, 29 October 2020

शरद पूर्णिमा

 *राम राम जी*


*शरद पूर्णिमा के दिन क्या करें और क्या नहीं, जानिए*


*शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते है। पश्‍चिम जगत में इसे ब्लू मून कहा जाता है। कहते हैं कि नीला चांद वर्ष में एक बार ही दिखाई देता है। एक शताब्दी में लगभग 41 बार ब्लू मून दिखता है। इस बार 30 अक्टूबर 2020 शुक्रवार को शरद पूर्णिमा है। आओ जानते हैं अश्विन मास में आने वाली शरद पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं।*


*क्या करें :-*


*1.* शरद पूर्णिमा के चांद में छत या गैलरी पर चांद की रोशनी में चांदी के बर्तन में दूध को रखा जाता है। फिर उस दूध को भगवान को अर्पित करने के बाद पिया जाता है। 

 

*2.* कुछ लोग पूर्ण चंद्रमा के आकाश के मध्य स्थित होने पर उनका पूजन करते हैं और खीर का नैवेद्य अर्पण करने के बाद रात को खीर से भरा बर्तन खुली चांदनी में रखकर दूसरे दिन उसका भोजन करते हैं।


*3.* इस दिन घर में माताएं ज्यादा दूध लेती है। फिर दिनभर उसे ओटाती या उकालती घोटती रहती हैं। फिर उसमें केसर-मेवा आदि डालने के बाद रात को छत पर ले जाकर चंद्रमा को उसका प्रसाद चढ़ाकर उसका पूजन करती हैं। फिर चांदी का पतीला चंद्रप्रकाश में रख दिया जाता है ताकि चंद्रकिरणों से बरसता अमृत उसमें समा जाए। अंत में उसे पिया जाता है।


*4.* शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी, चंद्र देव, भगवान शिव, कुबेर और भगवान श्री कृष्ण की आराधना की जाती है। शरद पूर्णिमा की रात में की गई चंद्र पूजन और आराधना से साल भर के लिए लक्ष्मी और कुबेर की कृपा प्राप्ति होती है।

 

*5.* शरद पूर्णिमा की रात में हनुमानजी के सामने चौमुखा दीपक जलाएं। इसके लिए आप मिट्टी का एक दीपक लें और उसमें तेल या घी भरें। इससे आपको हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

 

*6.* शास्त्रों में कहा गया है कि हर पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष पर मां लक्ष्मी का आगमन होता है। अत: आप सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पीपल के पेड़ के सामने कुछ मीठा चढ़ाकर जल अर्पित करें।


*7.* कहते हैं कि सफल दाम्पत्य जीवन के लिए पूर्णिमा के दिन पति-पत्नी दोनों को ही चन्द्रमा को दूध का अर्ध्य अवश्य ही देना चाहिए। इससे दाम्पत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है।

 

*8.* किसी भी विष्णु लक्ष्मी मंदिर में जाकर इत्र और सुगन्धित अगरबत्ती अर्पित करनी चाहिए और धन, सुख समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी से अपने घर में स्थाई रूप से निवास करने की प्रार्थना करें।

 

*9.* यदि कुंडली में चंद्र ग्रहण है तो यह दिन उसे हटाने का सबसे अच्छा दिन है। इस दिन चन्द्रमा से संबंधित चीजें दान करना चाहिए या इस दिन खुलकर लोगों दूध बांटना चहिए। इसके अलावा 6 नारियल अपने उपर से वार कर किसी बहती नदी में प्रवाहित करना चाहिए।

 

*10.* इस दिन शरद पूर्णिका की व्रत कथा सुनने के बाद व्रत का विसर्जन किया जाता है। व्रत कथा सुनने से जहां व्रत का लाभ मिलता है वहीं संतान सुख की प्राप्ति भी होती है।


*क्या ना करें:-*


*1. भोजन :-* इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। जैसे मांस, मटन, चिकन या मसालेदार भोजन, लहसुन, प्याज आदि।

 

*2. शराब :-* इस दिन किसी भी हालत में आप शराब ना पिए क्योंकि इस दिन शराब का दिमाग पर बहुत गहरा असर होता है। इससे शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं।

 

*3. क्रोध :-* इस दिन क्रोध नहीं करना चाहिए। वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन चन्द्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है इन कारणों से शरीर के अंदर रक्‍त में न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक रहता है। एक बार नहीं, प्रत्येक पूर्णिमा को ऐसा होता रहता है तो व्यक्ति का भविष्य भी उसी अनुसार बनता और बिगड़ता रहता है।


*4.भावना :-* जिन्हें मंदाग्नि रोग होता है या जिनके पेट में चय-उपचय की क्रिया शिथिल होती है, तब अक्सर सुनने में आता है कि ऐसे व्यक्‍ति भोजन करने के बाद नशा जैसा महसूस करते हैं और नशे में न्यूरॉन सेल्स शिथिल हो जाते हैं जिससे दिमाग का नियंत्रण शरीर पर कम, भावनाओं पर ज्यादा केंद्रित हो जाता है। अत: भावनाओं में बहें नहीं खुद पर नियंत्रण रखकर व्रत करें।

 

*5. स्वच्छ जल :-* चांद का धरती के जल से संबंध है। जब पूर्णिमा आती है तो समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है, क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है। मानव के शरीर में भी लगभग 85 प्रतिशत जल रहता है। पूर्णिमा के दिन इस जल की गति और गुण बदल जाते हैं। अत: इस दिन जल की मात्रा और उसकी स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।

 

*6. अन्य सावधानियां :-* इस दिन पूर्ण रूप से जल और फल ग्रहण करके उपवास रखें। यदि इस दिन उपवास नहीं रख रहे हैं तो इस दिन सात्विक आहार ही ग्रहण करें तो ज्यादा बेहतर होगा। इस दिन काले रंग का प्रयोग न करें और ना ही नकारात्मक बातें सोचे।


  *राम राम जी*


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Thursday, 15 October 2020

अमावस्या.....

 *अमावस्या (अधिक मास की अंतिम तिथि)*


*राम राम जी*


*अमावस्या पर पितरों के लिए पूजन अर्चन करने की परंपरा,को इसी  दिन करना चाहिए और उसके बाद जरूरतमंद लोगों को कुछ न कुछ  दान अवश्य करना चाहिए*


*शुक्रवार,16 अक्टूबर 2020 को अधिक मास* 

  *की अंतिम तिथि अर्थात.. अमावस्या है।*


*ध्यान दें* 


*शुक्रवार और अमावस्या का योग होने से इस दिन... महालक्ष्मी जी की पूजा अवश्य करें। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। ये नाम भगवान विष्णु जी ने इस माह को दिया था। इस वजह से अधिक मास की अंतिम तिथि पर श्रीहरि का अभिषेक भी करना चाहिए। और इस तिथि पर शिवलिंग पर जल भी चढ़ाएं और..... ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए।*


*स्कंदपुराण में लिखा है कि-*

     **************

अमा षोडशभागेन देवि प्रोक्ता महाकला।

संस्थिता परमा माया देहिनां देहधारिणी।।


*इस श्लोक के अनुसार अमावस्या  को चंद्र की महाकला कहा गया है, इसमें चंद्र की सभी सोलह कलाओं की शक्तियां शामिल होती हैं। इस कला का क्षय और उदय नहीं होता है*


*इस ........तिथि के स्वामी पितृदेव माने गए हैं। इसलिए अमावस्या पर पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य करने का महत्व है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करना चाहिए।*


     *||  ॐ पितृ देवाय नम: ||*

              🙏🙏

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*राम राम जी*

Wednesday, 2 September 2020

पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष)

 *राम राम जी*


*पितृ पक्ष......?*


इस वर्ष  2 सितंबर से 17 सितंबर तक 16 दिनों का होगा पितृपक्ष l पितृपक्ष में दो शब्द है l पितृ और पक्ष l


पितृ :- 


पितृ अर्थात पिता, पितामह, प्रपितामह, माता, प्रमाता वृद्ध प्रमाता, चाचा - चाची, बड़े भाई - भाभी और भी छोटे बड़े लोग घर परिवार के वे सभी सदस्य जो इस धरती पर नहीं है l अर्थात जिनकी मृत्यु हो गई है l  नाना नानी को भी पितर कहा जाता है l


पक्ष :- 


पक्ष दो तरह का होता है l एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष, कृष्ण पक्ष पितरों के लिए निर्धारित किया गया है l अश्विन मास के कृष्ण को पितृपक्ष कहा जाता है l पितृ पक्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को समाप्त होता है l


 

यह पुर पूरे 16 दिनों का पक्ष होता है l कभी-कभी तिथि के छय होने से पितृपक्ष 15 अथवा 14 दिनों का भी होता है  l


वर्ष 2020 में 16 दिनों का पितृपक्ष होगा जो 2 सितंबर 2020 बुधवार से आरंभ होकर 17 सितंबर गुरुवार 2020  को सर्वपितृ अमावस्या अथवा महालया या पितृ विसर्जन के रूप में संपन्न हो जाएगा l इस प्रकार इस वर्ष का पितृपक्ष कुल 16 दिनों का है l 


महालया आरंभ 1 सितंबर से और समाप्ति 17 सितंबर को सर्वपैतृ अमावस्या के साथ संपन्न l 


पितर ( पितृ ) किन्हे कहा गया है ? 


माता - पिता, पितामह - पितामही, प्रपितामह - प्रपितामही,  चाचा- चाची, भाई, भतीजा, बुआ, बहन- बेटी, नाना- नानी और मामा के अलावे वे सभी लोग जो लोग जीवित नहीं है l वे सभी पितृ की श्रेणी में आते हैं l 


पितृ तर्पण से क्या लाभ है  ? 


ऐसी शास्त्रीय मान्यता है की पितरों का तर्पण और उनके तिथि पर श्राद्ध करने से पितृ गण तृप्त होते हैं l और तर्पण करने वाले अपने वंशज को वंश वृद्धि तथा जन धन से संपन्न होने का आशीर्वाद देते हैं l जो लोग नियमित प्रतिवर्ष पितृ तर्पण अथवा पिता के निर्वाण तिथि पर उनका श्राद्ध करते हैं l उन्हें ऋण से मुक्ति प्राप्त होती है l धन संपन्नता आती है, और उनके वंशवेल में वृद्धि होती है l

 


स्वयं पितृ तर्पण कैसे करें ? 


वैसे तो तर्पण के लिए नदी जलाशय या तालाब का होना आवश्यक माना गया है  l और उसमें कर्मकांडी ब्राह्मण का साथ होना आवश्यक है l किंतु यदि ऐसी परिस्थिति नहीं हो और स्वयं तर्पण करना चाहते हैं l तो नदी तालाब अथवा अपने घर पर घर के बाहर तांबे, पीतल अथवा कांसे के पात्र में जल रखकर अपने पितरों का तर्पण किया जा सकता है l


कुशा, जौ, तिल, चंदन, स्वेत पुष्प, गंध और चावल से होता है पितृ तर्पण l


  जौ से तर्पण करने पर देवता और ऋषि गण प्रसन्न होते हैं, तो तिल और चावल से तर्पण करने पर यमराज और पितृ गण प्रसन्न होते हैं l इस प्रकार नियमित तर्पण करने वाले के घर में धन की कमी नहीं होती l तथा उसके वंशज कभी दरिद्रता के शिकार नहीं होते हैं l और उनकी वंशावली भी प्रभावित नहीं होती है l


पितृपक्ष के दिनों में क्या करें ?  


पितृपक्ष के दिनों में अपने पूज्य ब्राह्मण, ब्राह्मण, भगीना और जमाता को भोजन कराना तथा इनका सत्कार करना चाहिए l


माता पिता के निमित्त उनके श्राद्ध उनके निर्वाण ( मृत्यु) तिथि पर करने से पितृगण प्रसन्न होते हैं l


सौभाग्यवती मृत्यु को प्राप्त हुई माताओं का श्राद्ध नवमी तिथि में किया जाता है l


जिनके मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है l उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जाता है l


ब्राह्मणों को महा विष्णु स्वरुप मानकर उन्हें पितरों के संतुष्टि के लिए भोजन कराकर उचित दान सम्मान करने से घर परिवार में सुख शांति आती है l और वंश वेल में वृद्धि होती है l


क्या नहीं करें पितृ पक्ष में ?


पितृपक्ष में पितृ गण अपने वंशज जो कि तर्पण का कार्य करते हैं l पितृ गण उनके आसपास ही किसी न किसी रूप में विराजमान रहते हैं l


ईन 16 दिनों में किसी भी तरह का अनैतिक कार्य तर्पण कर्ता को नहीं करनी चाहिए l जिससे पितरों को नाराज होना पड़े l


पितृपक्ष में लहसून, प्याज, मांस, मदिरा का सेवन भी नहीं करनी चाहिए l अगर पितृपक्ष के दिनों में इस तरह के कार्य किये गये तो पितृगण नाराज हो जाते हैं l


किसी भी जीवजंतु की हत्या नहीं करनी चाहिए l सदाचार और ब्रह्मचर्य का उल्लंघन नहीं करनी चाहिए l


पितृपक्ष में बाल एवं नाखुन श्राद्ध तिथि के दिन ही काटने चाहिए l श्राद्ध के पहले या बीच में नहीं l


*राम राम जी*


*ज्योतिषाचार्य पवन कुमार वर्मा (B.A.,D.P.I.,LL.B.) लुधियाना, पंजाब, भारत*


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