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Wednesday, 1 July 2015

# उपाय ब पूजा पाठ , हवन के कुछ महत्वपूर्ण नियम

# उपाय ब  पूजा पाठ , हवन  के  कुछ महत्वपूर्ण नियम 
१. जिस दिन भी आपने घर में हवन करना हो या करवाना हो तो सबसे पहले यह जानना बहुत ही जरुरी है कि :- उस दिन हवन किया जा सकता है या नहीं... हवन करने के लिए अग्नि का वास कहाँ पर है यह जानना बहुत ही जरूरी है  हमारे शास्त्रों में अग्नि के वास के बारे में लिखा गया है कि अग्नि का वास 3 जगह पर होता है जैसे आकाश में ,,पाताल में ,और धरती (पृथ्वी ) पर .....हमे हवन तभी करना या करवाना चाहिए जब अग्नि का वास पृथ्वी (धरती ) पर हो उस दिन किया  या करवाया गया हवन कल्याणकारी यानि शुभ फलदायक होता है अगर अग्नि का वास पाताल  में हो तो उस दिन हवन करने या करवाने से धन का नुक्सान होता है .और यदि अग्नि का वास आकाश में हो तो उस दिन हवन करने या करवाने से घर -परिवार में किसी न किसी की आयु / सेहत शरीर का नुक्सान होने  का डर होता है  . ...हमारे शास्त्रो में अग्नि का वास देखने की विधि भी बताई गयी है जिसको देखे बिना हवन नहीं करना चाहिए हमारे शास्त्रो में अग्नि का वास देखने का बहुत सरल तरीका बताया हुआ है जिस की सही सही गणना करने पर अग्नि के वास का पता लगाया जा सकता है.
अग्नि का वास जानने के लिए सबसे पहले जिस दिन हवन करना हो या करवाना हो उस दिन की तिथि और वार की सख्या को जोड़कर 1 जमा करे फिर कुल जोड़ को 4 से भाग दें .यदि शेष 0 आये या 3 आये तो अग्नि का वास पृथ्वी पर होगा ( हवन शुभ फलदायी होगा ) और यदि शेष 2 आये तो अग्नि का वास पाताल में होगा ( हवन अशुभ फलदायी होगा ) और यदि 1 शेष आये तो अग्नि का वास आकाश में होगा (हवन अशुभ फलदायी होगा )......वार की गणना रविबार से और तिथि की गणना शुक्ल प्रतिपदा से करनी चाहिए... उसके बाद ग्रहों  के मुख में  आहुति पर भी विचार किया जाना चाहिए ..
हमारे शास्त्रो में अग्नि वास का परिहार भी बताया गया है जैसे .नित्य नैमित्तिक कार्य ,जन्म व् मृत्यु के समय , विवाह में ,यात्रा आरम्भ या यात्राकाल में , व्रतोद्यापन में ,ग्रहो की अनिष्ट गोचर स्थिति में मुंडन ,उपन्यादि संस्कार में ,ग्रहण शांति ,रोग - पीड़ा की शांति ,नवरात्र -दुर्गा -पूजा ,पुत्रादि संतान जनम काल में अग्निवास का विचार नहीं किया जाता ..       
.2.  उपाय  ब पूजा पाठ  करने के अपने नियम कायदे  है अगर कोई भी व्यक्ति  इन  नियमो के अनुसार उपाय पूजा -पाठ  करे तो उसको निश्चित ही उसकी परेशानियों से छुटकारा मिल जायेगा किसी भी उपाय  को करने से पहले उपाय  करने वाला  व्यक्ति अपने गुरु महाराज देवी -देवताओं को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेकर उपाय  करे और जिस भी उपाय  को वो कर रहा है उस उपाय  में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखकर करे.अधूरे मन से व् बिना विश्वास से किया हुआ उपाय  हमेशा निष्फल होता है इसलिए मैं आपको यही सलाह दूंगा कि आप कोई भी उपाय  करें पहले अपने मन में श्रद्धा और विश्वास रखें और अपने गुरु महाराज और देवी -देवताओं का नाम लेकर उनको प्रणाम करके ही उपाय  करें ऐसा करने से आपके दुवारा किया गया उपाय  कल्याणकारी सिद्ध होगा
आज के लिए इतना ही काफी बाकि के विचार अगली वार ..
PAWAN KUMAR VERMA ( B.A.,D.P.I.,LL.B.)
                         RESEARCH  ASTROLOGER
                                          GOLD MEDALIST

LUDHIANA ,PUNJAB , INDIA
PHONE:- 9417311379 .
astropawankv.blogspot.com

Monday, 8 June 2015

# क्या कहता है लाल किताब का रहस्यमयी वास्तु ज्ञान ......6

# क्या  कहता है लाल किताब का रहस्यमयी वास्तु ज्ञान .......6
आज मैं  आप सब के साथ फिर से  लाल किताब के रहस्यमयी वास्तु ज्ञान पर चर्चा करने जा रहा हु  मैंने आप सब को अपने पिछले लेख में लाल किताब के रहस्यमयी  वास्तु ज्ञान (क्या कहता है लाल किताब का रहस्यमयी वास्तु ज्ञान ...5 )  के बारे में अवगत करवाया था आज मैं  फिर से आप सभी के  साथ उसी रहस्यमयी वास्तु ज्ञान पर आगे विचार विमर्श करूँगा मैंने  आपको अपने पिछले लेख में बताया था  कि  लाल किताब के रहस्यमयी वास्तु ज्ञान के अनुसार आपका मकान किस हैसियत का है यानि उस मकान में रहने वालों पर उसका क्या प्रभाव है  क्या फल है शुभ फल है या अशुभ फल है .
 पिछली बार मैंने आपको बताया था कि अगर सही  सही गणित करने पर  6 बाकी आये तो ऐसा मकान /प्रॉपर्टी भी शुभ  फल ना देगी  देखने में आता  है कि  ऐसा मकान वाला  व्यक्ति अपनी पूरी उम्र परेशान और दुखी ही रहता है उसकी जन्मकुंडली में खाना नंबर .6 में सूर्य शनि साथ साथ और कुंडली में केतु ,मंगल, गुरु ,चन्द्र  और खाना नंबर 6,8,10 भी नेगटिव होते है वो व्यक्ति हर समय मुसीबत का मारा हुआ होता है न माता ही और न पिता ही सुख लेवें और न ही औलाद और उसके यार दोस्त उसको  सुख दे पूरी   ज़िंदगी सिर्फ भाग - दौड़ ही लगी रहेगी तकिया मुसाफिर वाला हाल होगा घर का सोना ख़त्म हो जायेगा घर में किसी को आखों की प्रॉब्लम होगी या फिर दिमागी या हड्डियों की परेशानियां होगी जिन का इलाज़ करने पर भी हल न मिलता होगा उसके रिश्तेदार उसके दोस्त यार भी उसका साथ नहीं देते होंगे अगर कभी एक आध बार  उसका साथ दे ही दिया होगा तो उसको उस साथ के बारे में 100 बार सुनाते होंगे जलील करते होंगे जिस कारण से वो अंदर ही अंदर हमेशा परेशान दुखी रहता होगा आदि ...
 आज हम जानंगे कि अगर सही सही गणना करने पर 7 बाकी बचे तो वो मकान कैसा होगा उसका फल क्या होगा  ऐसा मकान जिस का भी होगा उसकी कुंडली में राहु बहुत ही स्ट्रांग होगा उसका हर काम बैठे बिठाए होता होगा पशुओं / जानवरों / वाहनों  से भी फ़ायदा होगा वो व्यक्ति का राजनीती में भी अपना जोर होगा उसके बारे में लोग आम कहते हुए सूनी जाते होंगे कि हमारी तो कोई सुनता ही नहीं है और हमारा काम खभ बनता ही नहीं है लेकिन उस व्यक्ति के बारे में आम राय यही होगी कि इस व्यक्ति के पास पता नहीं क्या चीज है यह   व्यक्ति कोई भी उल्टा सीधा काम कर ले हमेशा ही फ़ायदा में होता है इसका हर काम हमेशा ही सीधा होता है और वो व्यक्ति बहुत ही कम समय में कामयाब होता हुआ दिखाई देता होगा.  इसी तरह से अगर 8 बाकी आये तो वो मकान का फल भी मंदा  ही होगा उसमे रहने वालों के मंगल शनि ग्रह जनमकुंडली में अशुभ घरों में होंगे उनको आये दिन किसी न किसी की मौत की खबर आती ही होगी और उस घर में रहने वालों को बहुत सी परेशानियों का सामना करना होगा उस घर में रहने वालों में ज्यादातर मेंबरों के ऑपरेशन/ सर्जरी  होती होगी यानि वो लोग शारीरक /मानसिक परेशानियों में ही रहते होंगे जब कभी थोड़ा  सा सुख का सांस लेते होंगे तो किसी न किसी तरफ से किसी की मौत की खबर आ जाती होगी यानि ज़िंदगी परेशानियों में ही गुजर  जाती है मालूम होगी  ..इत्यादि ऐसे व्यक्ति को चाहिए  कि वो   अपने घर के वास्तु दोष दूर करवाये  और  जनम कुंडली को किसी अच्छे विद्वान व्यक्ति से अपनी   जनम कुंडली को  दिखाकर पहले अपनी कुंडली को दरुस्त करवाये व्  बिना कुंडली को दरुस्त किये कोई उपाओ न करे न  दिखाए और कुंडली को दरुस्त करने के बाद कुंडली  के ग्रहों के  अनुसार उपाओ करे जैसे  अपने घर पर फूलों के हरे भरे  पौधे रखे और घर पर पक्षियों की सेवा करे उनकी  पालना करे घर में काला कुत्ता पाले उसकी सेवा करे लेकिन ध्यान रखे कि उसके इलावा  कोई बाहर  वाला व्यक्ति  उस कुत्ते को कुछ भी खाने को न दे  ..और  छोटे छोटे बच्चों को हमेशा खुश रखे उनको खाने पीने की चीजें दे  उन बच्चों को घर में खेलने कूदने दे आदि ..  तो उससे काफी हद तक उस व्यक्ति को उसकी   परेशानियों से छुटकारा मिल जायेगा
आज के लिए इतना ही काफी ......बाकी फिर सही    मैं  आपको अपने आने वाले  लेखो में   मैं आपको समझाने की कोशिश करूँगा कि लाल किताब का रहस्यमयी ज्ञान का   ज्योतिष / वास्तु रहस्य किस तरह से  काम करता है और  मकान कुंडली किस तरह से  बनानी है   और किस तरह से जन्मकुंडली दरुस्त करनी होती है और किस तरह से  जन्मकुंडली देख कर हमे व्यक्ति के मकान /घर के बारे में जानकारी होगी और जन्मकुंडली से ही अपने या अपने रिश्तेदारों का किस तरह से  पता चलता है और क्या जातक मकान /घर अपनी ज़िंदगी में बना पायेगा और iमकान /घर बनाने के बाद फ़ायदा या नुक्सान होगा. ..कि हमे अपनी ज़िंदगी में अपना मकान आदि    अपने नाम से बनाना चाहिए या नहीं ..अगर बनाते हैं तो वो  मकान / प्रॉपर्टी   किस हैसियत का है और वो मालिक के लिए कैसा होगा नेक फल का है या मंदा फल का है... आदि बहुत  सी  ऐसी बातें पता चल जाती है  जिनका पहले से  हमे पता ही नहीं होता है .अगली बार मैं आपको इसी रहस्य के बारे में और जानकारी दूंगा और  मैं  आपके साथ  अपने अगले आने बाले लेखों और कई अनजान रहस्यों के बारे में  विचार -  बिमर्श   करूँगा  और आप को यह बताने का प्रयास करूँगा कि लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में  हमे लाल किताब के रहस्यमयी ज्योतिष ज्ञान के  रहस्य में और क्या क्या समझाया है  इस तरह से हमे इस लाल किताब के रहस्यमयी ज्योतिष  ज्ञान से दरुस्त करके बनायीं गयी जन्मकुंडली में से ऐसी कई रहस्यों का  पता लगने लग जायेगा जो आपको न पहले पता होंगे और न ही पहले किसी ने आपको  बताये होंगे  यह सब बातें जानने के लिए सब से जरुरी शर्त यह  है कि आप को   अपनी जन्मकुंडली को पहले लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में दी गयी जरुरी शर्तो के अनुसार दरुस्त किया जाये और जन्मकुंडली को लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के अनुसार बनाया जाये या फिर  किसी लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान को गहराई  से  जानने वाले को कुंडली दिखाई जाये  तभी आपको इस लाल किताब के रहस्यमयी ज्योतिष ज्ञान के रहस्य समझ में  आने लगेंगे और आपको कौन कौन से उपाओ को करना होगा  जिनके करने से आपको ज़िंदगी में आने वाले कष्ट /परेशानियों से बचा जा सके ....आज के लिए इतना ही काफी ......बाकी फिर सही    .कि क्या कहता  है लाल किताब का रहस्यमयी ज्योतिष का वास्तु  ज्ञान .
PAWAN KUMAR VERMA ( B.A.,D.P.I.,LL.B.)
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Saturday, 9 May 2015

# लालकिताब के रहस्यमयी ज्ञान में गुरु ग्रह का फल .....

# लालकिताब के रहस्यमयी ज्ञान में गुरु ग्रह का फल .....
आज मैं आपके साथ लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के अथाह समुद्र में से  एक ऐसा रहस्य साँझा करने जा रहा हु  जिसमे आप जानेंगे कि लाल किताब के इस रहस्यमयी ज्ञान में ग्रहो के बारे में क्या क्या रहस्य है  उनके  खानाबार रहस्य  क्या क्या है और उनमे क्या क्या  रहस्य छिपा हुआ है ..इत्यादि   
लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में जन्मकुंडली का फलादेश करने से पहले जो सब से जरूरी पहलु है वो है जन्मकुंडली को लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के रहस्यमयी व्याकरण के अनुसार जन्मकुंडली को दरुस्त करना   जिसको किये  बिना सारा का सारा फलादेश और उसके  सभी उपाओ निष्फल होंगे अर्थात फलादेश भी गलत हो जायेगा और उपाओ अपना शुभ फल न देंगे बल्कि अशुभ फल देंगे  इसलिए सब से पहले जन्मकुंडली को दरुस्त करना बहुत ही जरुरी है कुंडली को दरुस्त करने के लिए लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान को अच्छी तरह से जानने वाला यानि जिस की लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान  के गूढ़ रहस्यों  पर अच्छी तरह से पकड़ /जानकारी हो उसी से जन्मकुंडली  को दरुस्त करवाना चाहिए ..लाल किताब को जानने वाले तो बहुत है लेकिन इसके रहस्यमयी गूढ़ रहस्यों को जानने वाला कोई कोई ही है .................
तो बात कर रहे थे   कि अगर आपकी जन्मकुंडली में गुरु ग्रह खाना नंबर 1 में हो तो लाल किताब का रहस्यमयी ज्ञान क्या कहता है   सबसे पहले आप लोगो के लिए यह जानना बहुत ही जरूरी  है  कि लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में गुरु ग्रह को किस -किस नाम  से पुकारा गया है लाल किताब के इस रहस्यमयी ज्ञान में गुरु ग्रह को   सुनार ,गद्दी पर बैठा साधु ,बाबा ,पिता  और पुत्र   ( गुरु और सूर्य ) शेर ,पीला  रंग या पीले रंग की चीजों के कारोवार  पूजा स्थान , मंदिर/धर्म स्थान,  हल्दी ,सोना ,केसर ,दाल चना ,मुर्गा ,पीपल ,पुजारी ,जगत गुरु ,बृद्ध सांस ,हवा .......इत्यादि कहा गया है . 
लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के अनुसार ऐसा जातक  जिस की कुंडली के खाना नंबर 1 में गुरु ग्रह बिराजमान  हो  तो वो जातक बहुत ही गुस्सा करने वाला होने पर भी साफ़ ,तबियत और नेक व्यक्ति होता हैलेकिन फलादेश से पहले देख ले कि   गुरु ग्रह के पक्के घरो में उसके शत्रु ग्रह  तो नहीं बैठे है अगर बैठे है   तो गुरु ग्रह के शुभ प्रभाव में कमी आ जाती है हमे पहले यह पता होना चाहिए कि गुरु ग्रह के पक्के घर कौन  कौन  से  है और गुरु ग्रह के शत्रु और मित्र  कोन कोन   से ग्रह है तो गुरु ग्रह के (2-5-8-12 ) दूसरा ,पांचवा नौवां ,और बहरवां  पक्के घर  है और इस ग्रह के शत्रु ग्रह बुध ,शुक्र और राहु है और इसी तरह  से गुरु ग्रह के मित्र ग्रह सूर्य ,चन्द्र और मंगल है जब  गुरु ग्रह किसी   की भी कुंडली में  अपने मित्र ग्रहों के साथ या उनकी शुभ दृस्टि में हो तो शुभ फल में वृद्धि करता है और जब अपने शत्रु ग्रहों के साथ या दृष्टि में हो तो अशुभ  फल में वृद्धि करता है   इसलिए सर्वप्रथम यह देखना बहुत ही जरुरी होता है कि गुरु ग्रह की कुंडली में स्थिति क्या है  और उस पर कौन कौन से ग्रहों की दृष्टियां पढ़ रही है और वो आप कौन कौन से ग्रहों पर  अपनी दृष्टि से देख रहा  है   वो शुभ है या अशुभ है इत्यादि बहुत सी और ऐसी बातें है जिन्हे  कुंडली में फलादेश करने से पहले देखना जरुरी होता है

.तो हम बात कर रहे थे कि लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में खाना नंबर 1 में गुरु ग्रह का ..इस रहस्यमयी लाल किताब में सभी  ग्रहों  का फल दो प्रकार से बताया गया है शुभ / नेक फल क्या होगा   और अशुभ/ मंदा फल क्या होगा
लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में गुरु ग्रह का खाना नंबर 1 में  होने पर वो जातक  गुस्सा करने वाला होने पर भी साफ़ ,तबियत नेक दिल और अपने मन  में किसी के साथ बहस या लड़ाई होने पर भी मन में बुराई न रखेगा और उसका माथा खुला (चोड़ा)   होगा  उसके अपने घर के पास या उसके जद्दी घर के पास गुरु ग्रह की चीजें  जरूर होगी  और उसकी आर्थिक सिथति उसकी आयु के साथ साथ बढ़ती जाएगी उसकी शिक्षा में रुकबाट जरूर आएँगी बहाना चाहे कोई भी बने  वो जातक   धर्म पर , परमात्मा पर भरोसा करने वाला होगा .और  उसे समाज में सम्मान प्राप्त होगा वो व्यक्ति अपनी किस्मत को अपनी दिमागी शक्ति से और राजदरवारी या उच्च लोगो के साथ से अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ेगा और शादी के बाद उसकी किस्मत जागना  शुरू हो जाएगी वैसे वो जातक  जिसकी  कुंडली के खाना नंबर १ में गुरु हो उस जातक के अंदर उसकी 16 साल  की आयु से ही परिवार  को  सँभालने की शक्ति  पैदा होगी   उसकी आयु बढ़ने के साथ साथ उसके अपने उसके घर परिवार के हालात में सुधार  आता जायेगा और वो व्यक्ति तरक्की  करता जायेगा वो कई तरह  के इल्मो का जानकार होगा उसके शत्रु  उसके ऊपर  सामने से बार नहीं करेंगे  लेकिन पीठ पीछे से बार करते  रहेंगे यानि उसके शत्रु उस से दब  कर  रहेंगे लेकिन  गुप्त शत्रु जरूर होंगे  चाहे वो बाहर के हो या अपने हो पर होंगे जरूर जो उसकी तरक्की से अंदर ही अंदर जलेंगे . वो जातक कभी भी निकम्मा और शक्की बददिमाग न होगा .सभी लोग   उसका आदर   करंगे   और  वो जातक  अपनी 27 साला उम्र में अपने पिता से अलग होगा या अलग  कोई कारोवार या कमाई  का साधन   जरूर बना  लेगा  अपनी कमाई  से ऊँचा मकान जरूर बनाएगा  और हो सकता है जब उस  जातक को पुत्र रत्न  प्राप्त  हो या वो अपना मकान बना ले तो उसके पिता पर इसका बुरा असर होगा और उनकी सेहत चिंता का कारण  बन  सकती  है  ऐसे  जातक  के   एक बच्चे की पैदाइश के बाद उसके दूसरे  बच्चे की उम्र में  आठ  साल ज्यादा फर्क  न होगा अगर ऐसा   हुआ  तो आगे औलाद न होगी और उसका हर 7  या 8   बा  साल  तरक्की   का न होगा     और अगर गुरु ग्रह पहले घर में हो और 8  बे घर में राहु हो या  गुरु ग्रह दूषित  हो  रहा हो  और  फिर उसने अपनी कमाई से किसी की शादी कर दी हो या मकान बना लिया हो तो पिता को सेहत के लिए  काफी परेशनी उठानी होगी  या हो सकता है कि उनकी मृत्यु  बीमार  होने से हो . अगर कुंडली में चन्द्र ग्रह अछा हो यानि शुभ हो तो वो जातक अछा ऑफिसर भी हो सकता है    और कुंडली  में चन्द्र ,मंगल दोनों ही शुभ हो तो उसके घर परिवार में हर तरह की सुख ऐशो आराम बढ़ते  जायेंगे और उसको जमीन जायदाद का सुख मिलेगा  बुजुर्गो से विरासत में हिस्सा मिलेगा इत्यादि ... अगर जाने -अनजाने में उस व्यक्ति ने कुछ ऐसे कर्म कर लिए जिस से गुरु ग्रह दूषित हो रहा हो तो जन्मकुंडली में शुभ होकर बैठा हुआ गुरु भी अशुभ फल देने लग जायेगा और  उपरोक्त फलों में बहुत कमी आ जाएगी और उस जातक को पता भी न चलेगा कि ऐसा क्यों हो रहा है   लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में    आता है कि गुरु अगर लगन में हो और फिर भी जातक को कष्ट आ रहे हो तो अपनी  ही गलतियां (कर्म ) होगी जो कि उसके पतन  की कारक होगी . जिस कारण से उसे लगेगा कि लोग अपने फायदे के लिए उसका इस्तेमाल करते है उसकी कोई कदर नहीं करता वो अपने अंदर ही अंदर परेशान रहता होगा उसको बदनामी  और  क़र्ज़ का  डर सताता होगा  और वो हर समय छोटी छोटी बात पर गुस्सा बहस करता होगा उसका चरित्र भी भरोसा करने के लायक न होगा और  उसकी सेहत ठीक नहीं रहती होगी और    उसकी बहिन बुआ या मासी दुखी या परेशान होगी और परिवार में किसी का विवाहित जीवन ख़राब होगा  उसके सर के  बाल छोटी उम्र में ही सफ़ेद होने लगेंगे घर में किसी को सांस ,छाती या दिल की बीमारी भी होने का डर होगा  उस जातक का मन  शांत न होगा और वो कभी  कभी  शांति  के लिए  सन्यासी  बनने  की तरफ  को जाता  होगा या उसको  घर बार छोड़ने  या भागने  को मन करता होगा अगर गुरु ग्रह अशुभ हो या अशुभ हो रहा हो तो ऐसा व्यक्ति लोगो की नौकरी  (गुलामी ) करेगा  और दिमागी /मानसिक  रूप  से व्यक्ति परेशान रहता होगा  सब कुछ होते हुए भी वो निराशा सी ज़िंदगी काट रहा होगा ऐसे  और  भी बहुत  से  रहस्य लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान में छिपे हुए है लेकिन इसमें लिखा गया है कि कुंडली में केवल एक ग्रह को देखकर फलित करना गलत होगा इसलिए जन्मकुंडली के सभी  ग्रहो को देख कर उन्हें लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के व्याकरण / फरमानों को समझ कर ही फलित करना होगा तभी इसके रहस्य समझ में आएंगे ....
अगर वो जातक अपने कर्मो को और अपने खानपान को ठीक कर ले तो वो गुरु ग्रह के अशुभ फल से बच सकता है जैसे वो केसर का तिलक लगाये  मीट -शराब  अंडा से दूर रहे  और कभी कभी नारियल या बादाम तेज चलते पानी में बहा दिया करे  नाक में चांदी  डालकर बुध के दोष से बचे   मंगल ग्रह की या शुक्र ग्रह की चीजें जमीन में दवाये गाये की  सेवा करे और अपनी पत्नी को पूरा मान- सम्मान दे कभी भी पीपल ,बजुर्ग ,पिता ,दादा या विद्वान व्यक्ति का अपमान न करे ..  इत्यादि ....आज के लिए इतना ही बाकि फिर कभी .
PAWAN KUMAR VERMA
              (B.A.,D.P.I.,LL.B.)
* RESEARCH ASTROLOGER * GOLD MEDALIST
PH.. +919417311379
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