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Tuesday, 15 August 2023

Happy Independence Day...

 From the whole Team of Astropawankv wish you all a very Happy Independence Day....


|| Verma's Scientific Astrology & Vastu Research Center ||

Ludhiana, Punjab, Bharat.

        Astropawankv


|| Let The Stars Guide You ||







Sunday, 13 August 2023

आशीर्वाद मांगा नहीं जाता....

 || आशीर्वाद मांगा नहीं जाता है ||

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संस्कृत= आशिस्+वाद) स्वस्तिवचन, मंगलकारी बातें, सद्भावना की अभिव्यक्ति, प्रार्थना या कल्याणकारी इच्छा को आशीर्वाद कहते हैं।


केवल आशीर्वाद से काम नहीं बना करते अपितु काम करने वालों को आशीर्वाद स्वयं मिल जाया करते हैं। प्रायः लोगों द्वारा यही बात कही जाती है कि हमें ऐसा आशीर्वाद दीजिये कि काम बन जाए मगर श्रेष्ठता तो इसी में है कि आप ऐसा काम कीजिये जिससे आपको आशीर्वाद स्वतः मिल जाए।


आशीर्वाद माँगना कभी भी बुरा नहीं मगर प्रयास और पुरुषार्थ के अभाव में केवल आशीर्वाद का सहारा लेकर सफलता प्राप्त करना अवश्य एक मानसिक संकीर्णता ही है। जिस प्रकार विद्युत में अपने आप में बहुत शक्तिशाली आवेग होता है। मगर बिना किसी यन्त्र की उपस्थिति अथवा संपर्क में आये बगैर वह निष्क्रिय ही है।


ठीक इसी प्रकार आशीर्वाद भी अपने आप में बहुत शक्ति लिए है मगर पुरुषार्थ के बिना वह भी निष्क्रिय ही है।अतः पुरुषार्थ करना सीखो क्योंकि जहाँ पुरुषार्थ,वहां सफलता और सफल व्यक्ति से भला आशीर्वाद कहाँ दूर है ?

अगर आपकी जन्मकुंडली में गुरू, सूर्य, चंद्र ग्रह अपनी अपनी राशि नक्षत्र ओर भाव तथा भाव नंबर एक, नौ, और पांच किसी भी प्रकार से पीड़ित नहीं है उन पर पापी ग्रहों की दृष्टि नहीं है और न ही छठा, आठवां भाव अपनी राशी, ग्रह, नक्षत्र से किसी भी प्रकार से पीड़ित नहीं हो रहा और न ही किसी ग्रह या भाव को पीड़ित कर रहा है तो आप देखेंगे कि आपको हर कष्ट, दुःख में किसी न किसी रूप में उस दुःख तकलीफ़ से उबारने के लिए आशीर्वाद रूपी सहायता बिन मांगे ही अवश्य मिल जाया करती होगी।

           || जय महाकाल ||

                ✍




*Research Astrologers Pawan Kumar Verma (B.A.,D.P.I.,LL.B.)& Monita Verma Astro Vastu... Verma's Scientific Astrology and Vastu Research Center Ludhiana Punjab Bharat Phone number..9417311379  www.astropawankv.com*

Friday, 4 August 2023

एक ज्ञान वर्धक कथा....

 *राम राम जी*


*एक ज्ञान वर्धक कथा....... कष्ट परेशानियों का मूल्य....*


*किसी स्थान पर संतों की एक सभा चल रही थी, किसी ने एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संतजन को जब प्यास लगे तो गंगाजल पी सकें*


*संतों की उस सभा के बाहर एक व्यक्ति खड़ा था, उसने गंगाजल से भरे घड़े को देखा तो उसे तरह-तरह के विचार आने लगे। वह सोचने लगा:- "अहा, यह घड़ा कितना भाग्यशाली है, एक तो इसमें किसी तालाब पोखर का नहीं बल्कि गंगाजल भरा गया और दूसरे यह अब सन्तों के काम आयेगा। संतों का स्पर्श मिलेगा, उनकी सेवा का अवसर मिलेगा, ऐसी किस्मत किसी-किसी की ही होती है।*


*घड़े ने उसके मन के भाव पढ़ लिए और घड़ा बोल पड़ा:- बंधु मैं तो मिट्टी के रूप में शून्य पड़ा था, किसी काम का नहीं था, कभी नहीं लगता था कि भगवान् ने हमारे साथ न्याय किया है। फिर एक दिन एक कुम्हार आया, उसने फावड़ा मार-मारकर हमको खोदा और गधे पर लादकर अपने घर ले गया।*


*वहां ले जाकर हमको उसने रौंदा, फिर पानी डालकर गूंथा, चाक पर चढ़ाकर तेजी से घुमाया, फिर गला काटा, फिर थापी मार-मारकर बराबर किया। बात यहीं नहीं रूकी, उसके बाद आंवे के अंदर आग में झोंक दिया जलने को। इतने कष्ट सहकर बाहर निकला तो गधे पर लादकर उसने मुझे बाजार में भेज दिया, वहां भी लोग ठोक-ठोककर देख रहे थे कि ठीक है कि नहीं?*

*ठोकने-पीटने के बाद मेरी कीमत लगायी भी तो क्या- बस 20 से 30 रुपये, मैं तो पल-पल यही सोचता रहा कि:- "हे ईश्वर सारे अन्याय मेरे ही साथ करना था, रोज एक नया कष्ट एक नई पीड़ा देते हो, मेरे साथ बस अन्याय ही अन्याय होना लिखा है।" भगवान ने कृपा करने की भी योजना बनाई है यह बात थोड़े ही मालूम पड़ती थी।*


*किसी सज्जन ने मुझे खरीद लिया और जब मुझमें गंगाजल भरकर सन्तों की सभा में भेज दिया तब मुझे आभास हुआ कि कुम्हार का वह फावड़ा चलाना भी भगवान् की कृपा थी। उसका वह गूंथना भी भगवान् की कृपा थी, आग में जलाना भी भगवान् की कृपा थी और बाजार में लोगों के द्वारा ठोके जाना भी भगवान् की कृपा ही थी।*


*अब मालूम पड़ा कि सब भगवान् की कृपा ही कृपा थी।*


*परिस्थितियां हमें तोड़ देती हैं, विचलित कर देती हैं- इतनी विचलित की भगवान के अस्तित्व पर भी प्रश्न उठाने लगते हैं। क्यों हम सबमें इतनी शक्ति नहीं होती ईश्वर की लीला समझने की, भविष्य में क्या होने वाला है उसे देखने की? इसी नादानी में हम ईश्वर द्वारा कृपा करने से पूर्व की जा रही तैयारी को समझ नहीं पाते। बस कोसना शुरू कर देते हैं कि सारे पूजा-पाठ, सारे जतन कर रहे हैं फिर भी ईश्वर हैं कि प्रसन्न होने और अपनी कृपा बरसाने का नाम ही नहीं ले रहे। पर हृदय से और शांत मन से सोचने का प्रयास कीजिए, क्या सचमुच ऐसा है या फिर हम ईश्वर के विधान को समझ ही नहीं पा रहे?*


*आप अपनी गाड़ी किसी ऐसे व्यक्ति को चलाने को नहीं देते जिसे अच्छे से ड्राइविंग न आती हो तो फिर ईश्वर अपनी कृपा उस व्यक्ति को कैसे सौंप सकते हैं जो अभी मन से पूरा पक्का न हुआ हो। कोई साधारण प्रसाद थोड़े ही है ये, मन से संतत्व का भाव लाना होगा।*


*ईश्वर द्वारा ली जा रही परीक्षा की घड़ी में भी हम सत्य और न्याय के पथ से विचलित नहीं होते तो ईश्वर की अनुकंपा होती जरूर है, किसी के साथ देर तो किसी के साथ सवेर। यह सब पूर्वजन्मों के कर्मों से भी तय होता है कि ईश्वर की कृपादृष्टि में समय कितना लगना है।*


*घड़े की तरह परीक्षा की अवधि में जो सत्यपथ पर टिका रहता है वह अपना जीवन सफल कर लेता है।*


*हर हर महादेव*

      *🙏🙏*




*Research Astrologers Pawan Kumar Verma (B.A.,D.P.I.,LL.B.)& Monita Verma Astro Vastu.... Verma's Scientific Astrology and Vastu Research Center Ludhiana Punjab Bharat Phone number 9417311379 www.astropawankv.com*